करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी, करवाचौथ व्रत एवं पूजन विधि के साथ।।
करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी, करवाचौथ व्रत एवं पूजन विधि के साथ।। करवा चौथ का महत्व करना बौथ व्रत का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्व है। करवा बौध का त्यौहार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी में मनाया जाता है। करवा चौथ में दो शब्द है। पहला शब्द करवा है, जिसका अर्थ होता है कि मिट्टी से बनरा बर्तना जबकि चौथ से आशव चतुर्थी तिथि से है। मानता है कि करत्रा का प्रयोग जीवन में सुख-समृद्धि को दर्शाता है। इस दिन विवाहित स्थिर्मा अपने पति के लिये विधि विधान के साथ लम्बी उम्र एवं सुखी जीवन की कामना हेतु निर्जला व्रत रखती है। करवा बौध पति-पत्नी के बीथ एक प्रेम और विश्वास से परिपूर्ण अटूट बंधन को दर्शाता है। करवा चौथ व्रत के नियम 1. सुचार सूर्योदय से पहले स्नान आदि करके पूजा घर की सफाई करें। और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। 2. यह व्रत उनको संध्या में सूरज अस्त होने के बाद चन्द्रमा के दर्शन करके ही खोलना चाहिए और बीच में जल भी नहीं पीना चाहिए। 3. संध्या के समय चंद्रोदय से घंटा पहले एक बेदी पर शिव-पार्वती स्वामीकार्तिक गणेश एवं चंद्रमा (मूर्ति के अभाव में सुपारी) की स्थापना करें एवं ...