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Showing posts from November, 2020

तुलसी_विवाह

#तुलसी_विवाह 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ #कार्तिकमास के शुक्लपक्ष की एकादशीतिथि में #देवठानी_ग्यारस अर्थात मांगलिक कार्यो पर लगी वर्जना के समाप्त होने, शुभकार्यो में देवों के आह्वान का पुनः आरंभ होने, और #तुलसीजी का #विवाह होने का भी शुभदिन है। इसमास में शुक्लपक्ष की एकादशीतिथि (देवोत्थानी एकादशी) के दिन तुलसी का विवाह शालिग्रामजी से हुआ था। तुलसी की महिमा अंनत और अपरंपार है,,, ♨ विष्णुजी को तुलसीमाता का श्राप था। शिवमहापुराण के अनुसार पुरातन समय में दैत्यों का राजा दंभ था, वह विष्णुभक्त था। बहुत समय तक जब उसके यहां पुत्र नहीं हुआ, तो उसने दैत्यों के गुरु शुक्राचार्य को गुरु बनाकर उनसे श्रीकृष्ण मंत्र प्राप्त किया और पुष्कर में जाकर घोर तप किया, उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णुजी ने उसे पुत्र होने का वरदान दिया।  ● भगवान विष्णुजी के वरदान स्वरुप दंभ के यहां पुत्र का जन्म हुआ (वास्तव में वह श्रीकृष्ण के पार्षदों का अग्रणी सुदामा नामक गोप था, जिसे राधाजी ने असुरों की योनी में जन्म लेने का श्राप दे दिया था) इसका नाम शंखचूड़ रखा गया, जब शंखचूड़ बड़ा हुआ तो उसने पुष्कर में जाकर ब्रह्माजी...
*कार्तिक-मास में सभी के लिए अनिवार्य* 1-- नित्य रात्रि के अन्तिम प्रहर में उठना।  2-- स्नान करना।  3-- ठाकुर जी को जगाकर आरती करना।  4-- तुलसी महारानी को जल से       सिंचित करके तुलसी वन्दना      करना। (नमो नमः तुलसी      कृष्णप्रेयसी ::::::::) 5-- प्रभु के पवित्र नाम का कीर्तन करना।       हरे कृष्ण महामंत्र का जप करना       संख्या बढ़ाकर जप करना अर्थात्       अन्य मास में जितनी माला करते      थे उससे बढ़ाकर या दोगुनी करना      ( 1 करते थे तो 2 करना         4 करते थे तो 8 करना          16 करते थे तो 32 करना)       जप तुलसी की माला पर ही      करना।  6-- तुलसी, मालती, कमल व सुगंधित पुष्पों से श्री दामोदर की पूजा करना।  7-- प्रतिदिन भगवान् की कथा का श्रवण करना, भगवद्गीता का पाठ अर्थ सहित कुछ इस प्रकार करना कि कार्तिक मास में पूर्ण हो जाये।  8-- प्रत...

शरद पूर्णिमा महत्व व्रत कथा पूजा विधि🌿

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शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर, 2020 शरद पूर्णिमा महत्व व्रत कथा पूजा विधि🌿 ⭐🌝🌝🌝🌝🌝🌝🌝🌝⭐ शरद की भीनी- भीनी ठण्ड में श्रद्धालु अपने परिवारजनों के साथ शरद की पूर्णिमा को उत्साह से मनाते है मान्यता हैं इस दिन रात्रि बारह बजे चन्द्रमा से अमृत गिरता हैं और चंद्रमा के इस आशीर्वाद को पाने के लिए खीर अथवा मेवे वाला दूध बनाकर घर की छत पर रखा जाता हैं जिसके चारो तरफ परिवारजन बैठकर भजन करते हैं । रात्रि बारह बजे के बाद चन्द्रमा की पूजा की जाती हैं और खीर प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती हैं ... शरद पूर्णिमा का महत्व ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इस व्रत सभी मनोकामना पूरी करता हैं इसे कोजागरी व्रत पूर्णिमा एवम रास पूर्णिमा भी कहा जाता हैं चन्द्रमा के प्रकाश को कुमुद कहा जाता हैं इसलिए इसे कौमुदी व्रत की उपाधि भी दी गई हैं इस दिन भगवान कृष्ण ने गोपियों संग रास लीला रची थी जिसे महा रास कहा जाता हैं कब मनाई जाती हैं शरद पूर्णिमा ? ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ आश्विन की पूर्णिमा को ही शरद पूर्णिमा कहा जाता हैं इसे उत्तर भारत में अधिक उत्साह से मनाया जाता हैं कहते हैं इस दिन चन्द्रमा में अभी 16 कलाओं म...

करवा चौथ व्रत की कथा

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#करवा #चौथ #व्रत #कथा: एक ब्राह्मण के सात पुत्र थे और वीरावती नाम की इकलौती पुत्री थी। सात भाइयों की अकेली बहन होने के कारण वीरावती सभी भाइयों की लाडली थी और उसे सभी भाई जान से बढ़कर प्रेम करते थे. कुछ समय बाद वीरावती का विवाह किसी ब्राह्मण युवक से हो गया। विवाह के बाद वीरावती मायके आई और फिर उसने अपनी भाभियों के साथ करवाचौथ का व्रत रखा लेकिन शाम होते-होते वह भूख से व्याकुल हो उठी। सभी भाई खाना खाने बैठे और अपनी बहन से भी खाने का आग्रह करने लगे, लेकिन बहन ने बताया कि उसका आज करवा चौथ का निर्जल व्रत है और वह खाना सिर्फ चंद्रमा को देखकर उसे अर्घ्‍य देकर ही खा सकती है। लेकिन चंद्रमा अभी तक नहीं निकला है, इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल हो उठी है।वीरावती की ये हालत उसके भाइयों से देखी नहीं गई और फिर एक भाई ने पीपल के पेड़ पर एक दीपक जलाकर चलनी की ओट में रख देता है। दूर से देखने पर वह ऐसा लगा की चांद निकल आया है। फिर एक भाई ने आकर वीरावती को कहा कि चांद निकल आया है, तुम उसे अर्घ्य देने के बाद भोजन कर सकती हो। बहन खुशी के मारे सीढ़ियों पर चढ़कर चांद को देखा और उसे अर्घ्‍य देकर खाना खान...

अहोई अष्टमी और राधा कुंड

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अहोई अष्टमी पर राधाकुंड में स्नान पर पाबंदी। अहोई अष्टमी के दिन यदि कोई दंम्पत्ति निस्वार्थ भाव से राधा कुंड में स्नान करता है तो उसे संतान की प्राप्ति अवश्य होती है, तो आइए जानते हैं क्या है राधा कुंड की मान्यता और इसकी कथा अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में स्नान से होती है संतान की प्राप्ति अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में स्नान की मान्यता  भगवान श्री कृष्ण की नगरी मथुरा में गोवर्धन गिरधारी की परिक्रमा के मार्ग में एक चमत्कारी कुंड पड़ता है। जिसे राधा कुंड के नाम से जाना जाता है। इस कुंड के बारे में मान्यता है कि नि:संतान दंपत्ति कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी की मध्य रात्रि को यहां दंपत्ति एक साथ स्नान करते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है। अहोई अष्टमी का यह पर्व यहां पर प्राचीन काल से मनाया जाता है। इस दिन पति और पत्नि दोनों ही निर्जला व्रत रखते हैं और मध्य रात्रि में राधा कुंड में डूबकी लगाते हैं। तो ऐसा करने पर उस दंपत्ति के घर में बच्चे की किलकारियां जल्द ही गूंज उठती है। इतना ही नहीं जिन दंपत्तियों की संतान की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। वह भी अहोई अष्टमी के दिन अपनी संतान के...

रमा एकादशी

दिनांक 11/11/2020 दिन बुधवार तदनुसार संवत् 2077 कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को आने वाली है👇🏻 "रमा एकादशी" कार्तिक महीने के कृष्णपक्ष में आने वाली एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण की उपासना करने और व्रत रखने से मनवांछित कामना पूरी होती है। रमा एकादशी को रम्भा एकादशी भी कहते हैं। इस दिन वासुदेव श्री कृष्ण के केशव रूप की उपासना की जाती है। कहते हैं कि इस दिन की पूजा से कान्हा से साक्षात्कार भी संभव हैं। इस एकादशी का व्रत रखने से पापों का नाश तो होता ही है, साथ में महिलाओं को सुखद वैवाहिक जीवन का वरदान भी मिलता है। "रमा एकादशी पूजा विधि" 1. सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान कृष्ण या केशव का पूजन करें। 2. पूजा करने के बाद मस्तक पर सफेद चन्दन लगाएं। इससे मस्तिष्क शांत रहेगा। 3. भगवान कृष्ण को पंचामृत, फूल और मौसमी फल अर्पित करें। 4. श्री कृष्ण के मन्त्रों का जाप करें। 5. पूजा के दौरान गीता का पाठ भी अवश्य करें। 6. रात को चंद्रोदय के बाद दीपदान करें। 7. एकादशी के दिन रात्रि में सोने का विधान नहीं है।...

दीपावली पूजन

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. पाँच दिन पाँच महापर्वो में तीसरा दिन "दीपावली पूजन" दीवाली पर माँ लक्ष्मी, सरस्वती एवं गणेशजी की पूजा की जाती है। इन दिन इन तीनों देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना कर उनसे सुख-समृद्धि, बुद्धि तथा घर में शांति, तरक्की का वरदान माँगा जाता है। दीवाली पर देवी-देवताओं की पूजा में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाता है जो निम्न प्रकार हैं- पूजन सामग्री दीवाली पूजा के सामान की लगभग सभी चीजें घर में ही मिल जाती हैं। कुछ अतिरिक्त चीजों को बाहर से लाया जा सकता है। ये वस्तुएं हैं- लक्ष्मी, सरस्वती व गणेश जी का चित्र या प्रतिमा, रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी तथा तांबे के दीपक, रुई, कलावा (मौलि), नारियल, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूँ, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, घृत, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, गंगाजल, यज्ञोपवीत (जनेऊ), श्वेत वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली, चांदी का सिक्का, देवताओं के प्रसाद हेतु मिष्ठान्न (बिना वर्क का) पूजन विधि दीवाली की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बि...

एकादशी के महत्त्व के बारे में शास्त्र-प्रमाण

एकादशी के महत्त्व के बारे में शास्त्र-प्रमाण 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 नमो नमस्ते गोविन्द बुधश्रवणसंज्ञक ॥ अघौघसंक्षयं कृत्वा सर्वसौख्यप्रदो भव । भुक्तिमुक्तिप्रदश्चैव लोकानां सुखदायकः ॥  मन में भौतिक इच्छा रखने वाले लोगों ने मोक्ष प्राप्त करने के लिए अथवा अपनी उद्देश्य-पूर्ति के लिए प्रत्येक एकादशी को उपवास रखना चाहिए। परंतु एकादशी का सच्चा उद्देश्य हैं भगवान्‌ को आनंद प्रदान करना। शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष हो, भरणी नक्षत्र हो या अन्य कोई भी कारण हो, भगवान्‌ श्री हरि का प्रेम और उनके धाम की प्राप्ति करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के लिए एकादशी को उपवास रखना आवश्यक हैं।   हज़ारों अश्वमेध यज्ञ करके और सैकडों वाजपेय यज्ञ करके जो पुण्य प्राप्त होता है, उस पुण्य की तुलना एकादशी के उपवास द्वारा प्राप्त होनेवाले पुण्य के सोलहवे हिस्से के साथ भी नहीं हो सकती।  इस पृथ्वी पर भगवान्‌ पद्मनाभ के दिन के समान (अर्थात्‌ एकादशी के समान) शुद्धि प्रदान करने वाला और पाप दूर कर सकने में समर्थ अन्य कोई भी दिन नहीं हैं।  ग्यारह इन्द्रियों के द्वारा (आँखें, कान, नाक, जीभ और त्वचा यह पाँच ज्ञानें...

श्री बांके बिहारी चालीसा

श्री बाँकेबिहारी चालीसा दोहा बांकी चितवन कटि लचक, बांके चरन रसाल, स्वामी श्री हरिदास के बांके बिहारी लाल ॥ ।। चौपाई ।। जै जै जै श्री बाँकेबिहारी । हम आये हैं शरण तिहारी ॥ स्वामी श्री हरिदास के प्यारे । भक्तजनन के नित रखवारे ॥ श्याम स्वरूप मधुर मुसिकाते । बड़े-बड़े नैन नेह बरसाते ॥ पटका पाग पीताम्बर शोभा । सिर सिरपेच देख मन लोभा ॥ तिरछी पाग मोती लर बाँकी । सीस टिपारे सुन्दर झाँकी ॥ मोर पाँख की लटक निराली । कानन कुण्डल लट घुँघराली ॥ नथ बुलाक पै तन-मन वारी । मंद हसन लागै अति प्यारी ॥ तिरछी ग्रीव कण्ठ मनि माला । उर पै गुंजा हार रसाला ॥ काँधे साजे सुन्दर पटका । गोटा किरन मोतिन के लटका ॥ भुज में पहिर अँगरखा झीनौ । कटि काछनी अंग ढक लीनौ ॥ कमर-बांध की लटकन न्यारी । चरन छुपाये श्री बाँकेबिहारी ॥ इकलाई पीछे ते आई । दूनी शोभा दई बढाई ॥ गद्दी सेवा पास बिराजै । श्री हरिदास छवी अतिराजै ॥ घंटी बाजे बजत न आगै । झाँकी परदा पुनि-पुनि लागै ॥ सोने-चाँदी के सिंहासन । छत्र लगी मोती की लटकन ।। बांके तिरछे सुधर पुजारी । तिनकी हू छवि लागे प्यारी ।। अतर फुलेल लगाय सिहावैं । गुलाब जल केशर बरसावै ।। दूध-भात नित भ...

वृंदा देवी अथवा तुलसी जी

🌿🌿 वृंदा देवी 🌿🌿             (तुलसी कृष्ण प्रियसी) जिस घर में तुलसी होती हैं, वहां यम के दूत भी असमय नहीं जा सकते। गंगा व नर्मदा के जल में स्नान तथा तुलसी का पूजन बराबर माना जाता है। चाहे मनुष्य कितना भी पापी क्यों न हो, मृत्यु के समय जिसके प्राण मंजरी रहित तुलसी और गंगा जल मुख में रखकर निकल जाते हैं, वह पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है। जो मनुष्य तुलसी व आवलों की छाया में अपने पितरों का श्राद्ध करता है, उसके पितर मोक्ष को प्राप्त हो जाते हैं। तुलसी प्रार्थना🙏 श्री तुलसी प्रणाम मंत्र… वृन्दायै तुलसीदेव्यै प्रियायै केशवस्य च।     कृष्णभक्ती – प्रदे देवि, सत्य वत्यै नमो नम: ।। 🌿🌿तुलसी वन्दना🌿🌿🙏 नमो नमः तुलसी कृष्ण प्रेयसी! राधा कृष्ण सेवा पाबो एइ अभिलाषी।।  नमो नमः तुलसी कृष्ण प्रेयसी! हे कृष्ण प्रिया तुलसी महारानी मै आपको बार बार प्रणाम करती हूँ। सदा श्री राधा कृष्ण की सेवा पाऊँ ऐसी अभिलाषा रखती हूँ। जे तोमार शरण लय, तार वाञ्छा पुर्ण हय। कृपा करि’ करो तारे वृन्दावन वासी ।। जो आपकी शरण लेता है उसकी सभी मनोकामनाएं...

श्री कृष्ण जन्म भाग 2

भगवान श्रीकृष्ण के  जन्म की कथा !!!!!!   भगवान श्री कृष्ण के जन्म को जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। ऐसा दुनिया में कौन अभागा होगा जो इस कथा को कौन नही जानता होगा? भगवान श्री कृष्णा की एक-एक लीला सुनकर मन को तृप्ति मिलती है। वैसे तो उनके जन्म का कौन गान कर सकता है। फिर भी जैसा मैंने गुरुदेव से सुना, पढ़ा और देखा है वो सब उन्ही के शब्दों में आपके सामने रख रहा हूँ। एक बार धरती माता बहुत दुःखी हुई। कंस जैसे बहुत सारे असुरों ने धरती माँ को बहुत परेशान किया। धरती पर पाप बढ़ गया। पृथ्वी ने गऊ का रूप बनाया और आँखों में आंसू लिए ब्रह्मा के पास गई और कहा बेटा ब्रह्मा! मेरे ऊपर पाप बहुत बढ़ गया है और मैं पाप से दबी जा रही हूँ। पृथ्वी की बात सुनकर ब्रह्मा जी बहुत दुःखी हुए और भगवान विष्णु के पास क्षीर-सागर गए। ब्रह्मा जी के साथ सारे देवता और भगवान शिव भी थे। सभी देवों ने मिलकर भगवान विष्णु स्तुति की।  भगवान की आकाशवाणी सुनाई दी। ब्रह्मा बोले कि देवताओं, मुझे भगवान की आज्ञा हुई है कि मैं जल्दी ही धरती पर देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लूंगा और मेरे साथ श्री बलराम जी और रा...

कृष्ण जन्म भाग 1

कृष्ण जन्माष्टमी Janamashtmi 2020 👣👣👣👣👣👣👣 अब बड़ा सुन्दर समय आया है। कृष्ण पक्ष, बुधवार है और चन्द्रमा रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। आकाश में तारो का प्रकाश है। एकदम से बादल गरजने लगे और बिजली चमकने लगी।  मंद मंद बारिश होने लगी है। अर्ध रात्रि का समय है। देवकी और वसुदेव के हाथ-पैरो की बेड़ियां खुल गई है और भगवान कृष्ण ने चतुर्भुज रूप से अवतार लिया है। देवकी और वसुदेव ने भगवान की स्तुति की है। देवकी ने कहा कि प्रभु आपका रूप दर्शनीय नही है, आप और बालको की तरह छोटे से बन जाइये। भगवान छोटे से बाल कृष्ण बनके माँ की गोद में विराजमान हो गए। वहाँ पर सुन्दर टोकरी है। उसमें मखमल के गद्दे लगे हुए है। भगवान की प्रेरणा हुई कि आप मुझे गोकुल में छोड़ आइये और वहाँ से कन्या को लेकर आ जाइये। वसुदेव चल दिए है। कारागार के द्वार अपने आप खुल गए और सभी सैनिक बेहोश हो गए। रास्ते मैं यमुना नदी आई है। वसुदेव जी यमुना पार कर रहे है लेकिन यमुना जी भगवान कृष्ण की पटरानी है। पैर छूना चाहती है लाला के। लेकिन ससुर जी लाला को टोकरी में लिए हुए है। यमुना ने अपना जल स्तर बढ़ाना शुरू किया। भगवा...

ठाकुर जी छठी

*ठाकुर जी छठी* 1.       प्रात:काल ठाकुर जी का पंचामृत से स्नान कराएं। 2.      स्नान की प्रक्रिया ऐसी ही रहेगी जैसे आपने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर की थी। यानी पहले गंगाजल से स्नान। फिर दूध से। फिर घी, शहद और बूरे से। तीन बार गंगाजल और तीन बार दूध से स्नान कराने के बाद आप पंचामृत से भी स्नान कराएं। तत्पश्चात, गंगाजल से स्नान कराएं। 3.      यदि आपके पास शंख है तो शंख से गंगाजल स्नान कराएं। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: या ऊं कृं कृष्णाय नम: का जाप करते रहें। 4.      पीले वस्त्र:स्नान के बाद ठाकुर जी का श्रृंगार करें। चूंकि छठी है, सो ठाकुर जी पीले वस्त्र पहनाएं। इससे गुरु की कृपा होगी। धन-धान्य और सुख-शांति की दृष्टि से यह अच्छा रहेगा। वस्त्र, मुकुट, श्रृंगार नया होगा। 5.      ठाकुर जी को उनके आसन पर विराजमान कराएं। मोर पंख का मुकुट पहनाएं या मोर पंख सिंहासन पर ही रखें। इससे राहू और केतू का प्रभाव कम होगा। 6.      भोग: ठाकुर जी को मिश्री और मक्खन का भोग लगाएं। 7.      छठी पर कड़ी चावल क...

राधाष्ट्मी महा महोत्सव

हरे कृष्ण ⚱⚱ श्री राधाष्ट्मी  महा महोत्सव 26 अगस्त को रखिए। 🔹 (_श्रीमती राधारानी के बारे में गर्ग संहिता और ब्रम्ह वैवर्त पुराण में विस्तार से वर्णन है।_) 🔹 ब्रज में आप चले जाए सर्वत्र राधे राधे की ही गूंज है। रिक्शा चालक हो या भक्त वृंद लोग सब राधे राधे बोलते ही मिलेंगे। 🥀"तप्त कंचन गौरांगी, राधे वृंदा वनेसवरि, वृषभानु सुते देवि प्रणमामि हरि प्रिये॥"  हे श्रीमती राधारानी! पिघले हुए स्वर्ण के समान रंग वाली, वृंदावन की महारानी, हे महाराज वृषभानु की पुत्री, भगवान श्री कृष्ण प्रिये, हे देवी हम आपको बार बार प्रणाम करते है।  श्रीमती राधा रानी जी सभी देवियों में श्रेष्ठ है। और वह सभी के लिए पूजनीय  है। वह सभी की संरक्षिका है। और वह पूरे ब्रह्मांड की माता है।  _ ( श्री चैतन्य चरितामृत आदि 4.89) श्रीमती राधारानी भगवान कृष्ण की  शाश्वत संगिनी है।  करीब 5200 साल पहले, जब भगवान कृष्ण इस धरा धाम पे प्रकट हुए तो उनकी अंतरंगा शक्ति ब्रज मंडल के रावल ग्राम में राजा वृषभानु के यहाँ उनकी लीला में योगदान के लिए प्रकट हुई। "भद्रपद महीने के शुक्लपछ की अष्ट्मी तिथि को म...

श्री सत्यनारायण व्रत कथा क्या और कैसे

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श्री सत्यनारायण व्रत कथा क्या और कैसे? 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 पूर्णिमा पर क्यों सुनी जाती है सत्‍यनारायण व्रत कथा...? 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ आमतौर पर देखा जाता है किसी भी शुभ काम से पहले या मनोकामनाएं पूरी होने पर सत्यनारायण व्रत की कथा सुनी जाती है। सनातन धर्म से जुड़ा शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने श्रीसत्यनारायण कथा का नाम न सुना हो । इस कथा को सुनने का फल हजारों सालों तक किए गये यज्ञ के बराबर माना जाता है । शास्त्रों के मुताबिक ऐसा माना गया है कि इस कथा को सुनने वाला व्यक्ति अगर व्रत रखता है तो उसेके जीवन के दुखों को श्री हरि विष्णु खुद ही हर लेते हैं । स्कन्द पुराण के मुताबिक भगवान  सत्यनारायण श्री हरि विष्णु का ही दूसरा रूप हैं । इस कथा की महिमा को भगवान सत्यनारायण ने अपने मुख से देवर्षि नारद को बताया है । पूर्णिमा के दिन इस कथा को सुनने का विशेष महत्व है । कलयुग में इस व्रत कथा को सुनना बहुत प्रभावशाली माना गया है ।  जो लोग पूर्णिमा के दिन कथा नहीं सुन पाते हैं , वे कम से कम भगवान सत्यनारायण का मन में ध्यान कर लें । विशेष लाभ होगा । पुराणों में ऐसा भी बताय...