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Showing posts from February, 2021

अधिक मास माहात्म्य

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 अधिक मास माहात्म्य. अधिक मास माहात्म्य, आठवाँ अध्याय सूतजी बोले  – हे तपोधन! विष्णु और श्रीकृष्ण के संवाद को सुन सन्तुष्टमन नारद, नारायण से पुनः प्रश्न करने लगे ॥ १ ॥   नारदजी बोले – हे प्रभो! जब विष्णु बैकुण्ठ चले गये तब फिर क्या हुआ? कहिये। आदिपुरुष कृष्ण और हरिसुत का जो संवाद है वह सब प्राणियों को कल्याणकर है ॥ २ ॥ इस प्रकार प्रश्न को सुन फिर भगवान् बदरीनारायण जगत् को आनन्द देने वाला बृहत् आख्यान कहने लगे ॥ ३ ॥   श्रीनारायण बोले  – तदनन्तर विष्णु बड़े प्रसन्न होकर बैकुण्ठ गये और वहाँ जाकर हे नारद! अधिमास को अपने पास ही बसा लिया ॥ ४ ॥ अधिमास बैकुण्ठ में वास पाकर अत्यन्त प्रसन्न हुआ और बारहों मासों का राजा होकर विष्णु के साथ रहने लगा ॥ ५ ॥ बारहों मासों में मलमास को श्रेष्ठ बनाकर विष्णु मन से सन्तुष्ट हुए ॥ ६ ॥ हे मुने! अनन्तर भक्तों के ऊपर कृपा करने वाले भगवान् युधिष्ठिर और द्रौपदी की ओर देखते हुए, कृपा करके अर्जुन से यह बोले ॥ ७ ॥   श्रीकृष्ण बोले  – हे राजशार्दूल! हमको मालूम होता है कि तपोवन में आकर आप लोगों ने दुःखित होने के कारण पुरुषोत्तम मा...

श्रावण मास माहात्म्य

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श्रावण मास माहात्म्य   वरलक्ष्मी व्रत कथा सब देवों से सेवित कैलाश के शिखर पर महादेव गौरी के साथ चौसर खेल रहे थे ।। वे दोनों एक दूसरे से कहने लगे कि, मैंने तुम्हें जीत लिया, इस प्रकार उनका एक दूसरे से  विवाद हो गया।। वहाँ पर चित्रनेमि भी उपस्थित था शिव–पार्वती ने चित्रनेमि से पूछा तो वह झूठ बोला कि; शिवजी जीते। इससे गौरी ने क्रोध में आकर शाप दे डाला कि ।। हे झूठे चित्रनेमि ! तुझे कुष्ठ रोग  हो जाये। चित्रनेमि हतप्रभ हो गया। पीछे शिव बोले कि, चित्रनेमि महाप्रज्ञ और बुद्धिमान है, मैंने तृण के  बराबर भी पाप  इसमें देखा या  सुना नहीं है परम बुद्धिमानी चित्रनेमि कभी झूठ नहीं बोलता सत्य कहता है, हे देवी ! आप इस पर कृपा करें ।। इस पर दयालु हो कर पार्वती जी ने उसे कहा कि, जब सुंदर सरोवर पर अप्सराएं पवित्र व्रत  करेंगी तथा एकाग्र मन से तुझे सब कुछ कहेंगी उस समय तुम शाप से मुक्त हो जाओगे ! इतना कहते ही चित्रनेमी वहाँ से उसी समय उस सरोवर को गया ।। उस सरोवर पर चित्रनेमी कोड़ी होकर रहने लगा।। वहाँ उसने स्वर्ग में विलास करने वाली अप्सराओं को देखा ।। वे सब देव पूजन मे...