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भारतीय समय की इकाइयां(Indian time units)

भारतीय समय की इकाइयां(Indian time units) प्रथम खंड ६० त्रुटि = १ रेणु ६० रेणु = १ लव ६० लव = १ लीक्षक ६० लीक्षक = १ प्राण ६० प्राण = १ पल ६० पल = १ घटी द्वितीय खंड ६० प्रतिपल = १ विपल ६० विपल = १ पल ६० पल = १ घटी २४ Minute = १ घटी २½ पल = १ Minute २½ विपल = १ Second २½ घटी = १ घंटा ६० घटी = २४ घंटा ६० प्रति-विकला = १ विकला ६० विकला = १ कला ६० कला = १ अंश ३० अंश = १ राशि १२ राशि = १ भचक्र तृतीया खंड ८ भव = १ अंगुल २४ अंगुल = १ हाथ ४ हाथ = १ बांस २००० बांस = १ कोस   चतुर्थ खंड २ घटी = १ मुहूर्त ७½ घटी = १ पहर ८ पहर = १ अहोरात्र ३० मुहूर्त = १ अहोरात्र ३० अहोरात्र = १ मास १२ मास = १ वर्ष १ वर्ष = १ दिव्य दिन ३६० दिव्य दिन = १ दिव्य वर्ष १२००० दिव्य वर्ष = १ चतुर्युग  १००० चतुर्युग  = १ ब्रह्मा का दिन/ श्रीहरि का शयन 

१ से परार्ध (१,00,00,00,00,00,00,00,000) तक गिनती |

१ से परार्ध (१,00,00,00,00,00,00,00,000) तक गिनती | Sanskrit counting from 1 - 1,00,00,00,00,00,00,00,000 ============================== एक-दश-शत सहस्रायुत-लक्ष-प्रयुत-कोटयः क्रमशः | अर्बुदमब्ज खर्व-निखर्व-महापद्म-शङ्कवस्तस्मात् || जलधिश्चान्तं मध्यं परार्धमिति दशगुणोत्राः संज्ञाः | संख्यायाः स्थानानां व्यवहारार्थं कृताः पूर्वैः || ============================== 1. One एकम् (ekam) 2.Two द्वे (dve) 3.Three त्रीणि (treeni) 4. Four चत्वारि (chatvaari) 5. Five पञ्च (pancha) 6. Six षट् (shat) 7. Seven सप्त (sapta) 8. Eight अष्ट (ashta) 9. Nine नव (nava) 10. Ten दश (dasha) 11. Elelven एकादश (ekaadasha) 12. Twelve द्वादश (dvaadasha) 13. Thirteen त्रयोदश (trayodasha) 14. Fourteen चतुर्दश (chaturdasha) 15. Fifteen पञ्चदश (panchadasha) 16. Sixteen षोडश (shodash) 17. Seventeen सप्तदश (saptadasha) 18. Eighteen अष्टादश (ashtaadasha) 19. Nineteen नवदश (navadasha) 20. Twenty विंशतिः (vimshatihi) 21. Twenty one एकविंशतिः (ekavimshatihi) 22. Twenty two द्वाविंशतिः (dvaavimshathi) 23. Twenty three त्रयो...
संक्षिप्त स्कन्द पुराण महेश्वर खण्ड ------------------- प्रजापति दक्ष(ब्रह्मा-पुत्र) की पुत्री सती का विवाह महादेव के साथ हुआ, एक बार जब प्रजापति नैमिषारण्य में विचर रहे थे तब सभी (ऋषि-मुनि, असुरादि) ने उनका सत्कार और प्रणाम किया परन्तु महादेव ने नहीं जिससे वो रुष्ट हो गए और भगवान् शंकर को कटु वचन सुनाये और शूलपाणि को यज्ञ से बहिष्कृत होने का शाप दिया । एक बार प्रजापति ने एक महान यज्ञ का आयोजन किया और सभी ऋषि मुनियो और देवताओं को बुलाया पर महात्मा शंकर को नहीं बुलाया । यह देखकर वहां आये हुए दधीचि बहुत कुपित हुए और वहांटीT से चले गए । जब सती को शंकर जी के न बुलाये जाने का पता लगा तो उनसे आज्ञा लेकर वह अपने पिता के यहाँ उनकी सद्भावना/दुर्भावना जानने गयी । वहाँ दक्ष ने सती को खरीखोटी सुनाई और शंकर जी को भी अपमानित किया जिससे रुष्ट होकर सती ने वहीं देह-त्याग का निश्चय किया और अग्नि में समा गयी ।  जब नारद जी ने शिवजी को सती के देहत्याग का बताया तो वह क्रोधित हुए और अपनी जटा उखाड़कर पर्वत पर दे मारी जिससे वीरभद्र और करोडो भूतों से घिरी काली का प्राकट्य हुआ । वे दोनों महादेव की आज्ञा से यज...