कार्तिक मास के प्रमुख त्योहार संपूर्ण जानकारी
कार्तिक मास के प्रमुख त्योहार 1. कार्तिक स्नान (हेमाद्रि) धर्म-कर्मादि की साधना के लिये स्नान करने की सदैव आवश्यकता होती है। इसके सिवा आरोग्य की अभि-वृद्धि और उसकी रक्षा के लिये भी नित्य स्नान से कल्याण होता है। विशेषकर माघ, वैशाख और कार्तिक का नित्य स्नान अधिक महत्त्व का है। कार्तिकं सकलं मासं नित्य-स्नायी जितेन्द्रियः । जपन् हविष्य-भुक्छान्तः सर्व-पापैः प्रमुच्यते ॥ मदन-पारिजात कार्तिक मास में जितेन्द्रिय रहकर नित्य स्नान करे और हविष्य (जौ, गेहूँ, मूंग तथा दूध, दही और घी आदि) का एक बार भोजन करे तो सब पाप दूर हो जाते हैं। इस व्रत को आश्विन की पूर्णिमा से प्रारम्भ करके ३१ वें दिन कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा को समाप्त करे। इसमें स्नान के लिये घर के बर्तनों की अपेक्षा कुंआ, बावली या तालाब आदि अच्छे होते हैं और कूपादि की अपेक्षा कुरुक्षेत्रादि तीर्थ, अयोध्या आदि पुरियाँ और काशी की पाँचों नदियाँ एक-से-एक अधिक उत्तम हैं। ध्यान रहे कि स्नान के समय जलाशय में प्रवेश करने के पहले हाथ-पाँव और मैल अलग धो ले। आचमन करके चोटी बाँध ले और जल-कुश जल- से संकल्प करके स्नान करे। संकल्प में कुश...