कार्तिक मास की आर्तियां और भजन
कार्तिक मास की आर्तियां और भजन श्री गणेश जी की आरती जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा । माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी। माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥ अंधन को आँख देत, कोढ़िन को काया। बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा। लड्डुअन का भोग लगे, संत करे सेवा ॥ दीनन की लाज राखो, शम्भु पुत्र वारी। मनोरथ को पूरा करो, जाऊँ बलिहारी ॥ गुरुदेव से विनती सतगुरु प्यारे से मिलन कैसे होए। खिड़की तो चारों बंद पड़ी ॥ 1. रामा पहली खिड़की खोल के देखूँ, उसमें काँट-बबूल। मुझसे इतना ना होये भगवान, झाड़ें तो यामें दे के चलूँ ॥ 2. रामा दूजी खिड़की खोल के देखूँ, उसमें गंगा-जमुना। मुझसे इतना न होये भगवान्, गोता तो यामें मार चलूँ ॥ 3. रामा तीजी खिड़की खोल के देखूँ, उसमें भोले बाबा। मुझसे इतना ना होये भगवान्, पूजा तो याकी करके चलूँ ॥ 4. रामा चौथी खिड़की खोल के देखूँ, उसमें श्री भगवान् । मुझसे इतना ना होये भगवान्, दर्शन तो याके करके चलूँ ॥ 5. रामा पाँचवीं खिड़की खोल के देखूँ, उसमें गुरु भगवान् । मुझसे इतना ना होये भगवान्, ज्ञान तो इनसे ले के चलूँ ॥ 6. र...