उपाय

7 नवंबर 2023
उपाय 01
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं हर हर महादेव
यदि कोई जमीन जायदाद के झगड़े, अदालत में भाई-भाई या पति पत्नी का केस या किसी गलत तरीके से कोई आक्षेप लगा कर केस लगा दिया है या कोई प्रशासनिक कार्यवाही चल रही है। तो यह उपाय अवश्य करें।
श्री गोपेश्वर शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन की गुरुजी ने बताया एक अचूक उपाय, आप पूर्ण विश्वास के साथी से करेंगे तो मुझे भरोसा है कि आप अपने कार्य में अवश्य सफल होंगे।
इस उपाय में करना क्या है?
अपने घर के एक लोटे में अपने घर का जल लीजिए, जल के साथ में एक बैल पत्र, एक शमीपत्र, एक दूर्वा अर्थात एक दूब घास, एक कनेर का पुष्प और एक अक्षत अर्थात एक आखा चावल आदि पांच वस्तुएं एकत्रित करें। किसी बिली पत्र के वृक्ष के नीचे जाएं। पार्थिव शिवलिंग का निर्माण करें। उसका पूजन करें तथा उसी शिवलिंग पर रंगेश्वर महादेव, चंपेश्वर महादेव कुंदकेश्वर महादेव के नाम लेकर और अपनी मनोकामना याद करते हुए, एक-एक कर ये पांचो वस्तुएं शिवलिंग पर अर्पित करें। 
इसके उपरांत पार्थिव शिवलिंग का विसर्जन करें और इन पांचो वस्तुओं को उठाकर अपने घर ले आए और स्वच्छ स्थान पर रख दें, तो 20 दिन के अंदर अंदर 21वें या 22वें दिन में यदि भगवान शिव ने चाहे तो आपका कार्य अवश्य पूर्ण होगा।

★ रंगेश्वर महादेव विजेता के प्रतीक हैं क्योंकि इन्हीं के आशीर्वाद के उपरांत भगवान श्री कृष्ण ने कंस का वध किया था।

(यह उपाय गुरु जी पंडित प्रदीप मिश्रा जी की पांचवें दिन की श्री गोपेश्वर शिव महापुराण कथा से लिया गया है।)

१२:१३

उपाय 02
श्री शिवाय नमस्तुभ्यं । हर हर महादेव ।
यदि परीक्षा या इंटरव्यू देने जा रहे हो तो

अच्छे से पढ़ाई करो, अच्छी मेहनत करो, दिल से तैयारी करो, तैयारी में रात दिन एक कर दो । जब तुम्हें अपनी मेहनत पर भरोसा हो जाए कि मैं मेहनत की है बाबा मुझे उसका फल अवश्य देगा। तब एग्जाम देने जाने से पहले

एक अंतिम काम और करें। 

मंदिर में पांच बेलपत्र, लाल तथा पीला चंदन लेकर जाएं।

मंदिर पहुंचकर लाल चंदन से और जलहरी पर लाल चंदन की केवल सात बिंदी लगाएं, अब पीला चंदन लें और अशोक सुंदरी के स्थान पर पीला चंदन की केवल पांच बिंदी लगाओ। 

अब पांच बेलपत्र लेकर भगवान पशुपतिनाथ का नाम लेकर एक करके शिवलिंग पर अर्पित करें। परंतु ध्यान रहे कि इन पांच बैल पत्रों की डंडिया पंचमुखी दीप की बत्तियां की तरह अलग-अलग पांच दिशाओं में होनी चाहिए।

जब यह काम कर ले तो बेलपत्र के ऊपर अपना हाथ रखकर अर्थात बाबा को स्पर्श करके अपने मन की कामना बोले, बाबा मैं तेरी शरण में हूं और मुझे विश्वास है कि तू मुझे इस परीक्षा में पास अवश्य कराएगा और मुझे नौकरी अवश्य दिलाएगा। ऐसा करने के उपरांत अपने गंतव्य स्थान की ओर जाएं। बाबा आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण करेगा।

★ 5 दिशाओं में बेलपत्र की डंडी रखने का उद्देश्य सभी राहों में आने वाली अडचनों को दूर कराना है।

२:३०.१२

बैल पत्र, शमीपत्र, दूब घास, कनेर और आखा चावल, 
रंगेश्वर, चंपेश्वर, कुंदकेश्वर के नाम लेकर बेलपत्री के वृक्ष के नीचे पार्थिव शिवलिंग बनाकर अर्पित करें।
सारे काम बनेंगे।
१२:१३.२

पहले चंदन भगवान भोलेनाथ को अर्पित करें फिर अपने मस्तिष्क पर धारण करने पर अच्छा फलदाई रहेगा।

कुबजा, चंदन और रंगेश्वर महादेव की कहानी थोड़ा जबाब रामकृष्ण कुमार ने में ऐसे फोटो हे एक राशि में

नमृता को खुद के व्यवहार से और बेटी और गाय को अपनी घर के द्वार से भूखा न जाने देना।

सात बार चंदन जलहरी पर, पांच बार पीला चंदन अशोक सुंदरी पर तथा पांच बेलपत्र भगवान भोलेनाथ पर जिनकी डंडिया पांच दिशाओं में करते हुए अर्पित करते हुए उनके ऊपर हाथ रख कर मन की कामना करें व परीक्षा के लिए जय अवश्य सफलता मिलेगी।

उपाय 03
गांठ गलाने के लिए उपाय
बेलपत्र की डंडी के बिल्कुल पीछे के भाग को जो एक मोटी सी गांठ के रूप में होता है उसे गांठ या डूंठ या ठूंठ कहते हैं। शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र की गांठ या डूंठ या ठूंठ की मूलता बहुत है।

शंकर भगवान को चढ़े बैल पत्र को उठाकर।  गांठ या डूंठ या ठूंठ तोड़कर अशोक सुंदरी व हाटकेश्वर महादेव भगवान को याद करके और उस गांठ या डूंठ या ठूंठ को अशोक सुंदरी के स्थान पर चढ़ाने या छुआने के उपरांत व उसे उठा कर। वही चबा-चबाकर खाने से शरीर में कैसे भी गाठ हो वह गल जाएगी।

२:३४.१५





डंडे को हाथ में लेकर भागा को चढ़ाकर 

 प्रार्थना कर के और 



हलवाई के दोस्त सारा सामान देखा होता है लेकिन भोजन में डाल के तुमसे का पत्र के नए लेखा होता जो हम याद रखना होता है और चीता किस भोजन में डाल सके।

 संसार के लिस्ट में परमात्मा का नाम नहीं लिखा 3होता मैं याद करना आता है।
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बैकुंठ, स्वर्ग पुनः धरती पर भेजा जाता है। कैलाश वासी को नही

सूर्य सखी की कहानी
रोग मुक्त व कार्य सफल के लिए 
दक्षिण में बैठ कर पहले बैल पत्र अशोक सुंदरी पर दूसरे को भोले पर चढ़ा कर दक्षिण में खड़े हो कर तो भोलेनाथ तीसरे ने तर अशोक सुंदरी की तीसरी दृष्टि से अशोक सुंदरी को कृपा दृष्टि प्रदान करते हैं।



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