भगवान विष्णु का महीना है कार्तिक, इन दिनों क्या करना चाहिए और क्या नहीं


भगवान विष्णु का महीना है कार्तिक, इन दिनों क्या करना चाहिए और क्या नहीं

हिंदू कैलेंडर का पवित्र महीना कार्तिक, सोमवार से शुरू हो रहा है। इस महीने में पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार और मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। ज्योतिषाचार्य पं प्रवीण द्विवेदी के अनुसार कार्तिक महीने में भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा का विशेष महत्व होता है। पं द्विवेदी के अनुसार कार्तिक महीने में सूर्योदय से पहले शीतल जल का स्नान करना सबसे उत्तम है। कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से धरती के जितने तीर्थ स्थान है, उनका पुण्य मिलता है।

कार्तिक माह में पूर्ण निष्ठा और भक्ति भाव से पूजा अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। कार्तिक महीने में बड़े और मुख्य तीज-त्योहार पड़ते हैं। कार्तिक महीने की शुरुआत शरद पूर्णिमा से हो जाती है। इसके बाद करवा चौथ, धनतेरस, रूप चौदस, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, देव उठनी एकादशी आदि पर्व मनाए जाएंगे। कार्तिक महीने का समापन गुरू नानक पूर्णिमा पर होता है। पं द्विवेदी के अनुसार कार्तिक महीने में देवउठनी एकादशी के अवसर पर एक बार फिर शुभ एवं मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। विवाह, शादी, गृह प्रवेश, मुहूर्त आदि का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा।
 

कार्तिक महीने का महत्व
1. हिंदू पंचांग के 12 मास में कार्तिक भगवान विष्णु का मास है। इसमें नक्षत्र-ग्रह योग, तिथि पर्व का क्रम धन, यश-ऐश्वर्य, लाभ, उत्तम स्वास्थ्य देता है।
2. प्राचीन काल में अलग-अलग महीनों में वर्ष की शुरूआत होने का उल्लेख मिलता है, लेकिन आधुनिक काल में वर्ष का आरम्भ भारत के विभिन्न भागों में कार्तिक या चैत्र मास में होता है।
3. इसी मास में शिव पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर राक्षस का वध किया था, इसलिए इसका नाम कार्तिक पड़ा, जो विजय देने वाला है।
4. कार्तिक महीने का माहात्म्य स्कन्द पुराण, नारद पुराण, पद्म पुराण में भी मिलता है। 
5. कार्तिक मास के लगभग बीस दिन मनुष्य को देव आराधना द्वारा स्वयं को पुष्ट करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसलिए इस महीने को मोक्ष का द्वार भी कहा गया है।
6. शास्त्रों में कहा गया है कि कार्तिक मास में मनुष्य की सभी आवश्यकताओं, जैसे- उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक उन्नति, देव कृपा आदि का आध्यात्मिक समाधान बड़ी आसानी से हो जाता है।
 

इस महीने में क्या करें और क्या नहीं
  शास्त्रों के मुताबिक इस महीने में मांस-मछली व मट्ठा का त्याग करना चाहिए। इसके साथ ही पूरे महीने संयम से रहना चाहिए। इसके अलावा व्रत-उपवास और नियम के साथ तप करना चाहिए। 
 1. दीपदान - धर्म शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीपदान करना बताया गया है। इस महीने में नदी, पोखर, तालाब आदि में दीपदान किया जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। 
 2. तुलसी पूजा इस महीने में तुलसी पूजन करने तथा सेवन करने का विशेष महत्व बताया गया है। वैसे तो हर मास में तुलसी का सेवन व आराधना करना श्रेयस्कर होता है, लेकिन कार्तिक में तुलसी पूजा का महत्व कई गुना माना गया है। 
 3. भूमि पर शयन भूमि पर सोना कार्तिक मास का तीसरा प्रमुख काम माना गया है। भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं। 
 4. सिर्फ एक दिन लगाएं तेल कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी) के दिन ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए। कार्तिक मास में अन्य दिनों में तेल लगाना वर्जित है। 
 5. द्विदलन निषेध कार्तिक महीने में द्विदलन अर्थात उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए। 
 6. ब्रह्मचर्य कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन अति आवश्यक बताया गया है। इसका पालन नहीं करने पर पति-पत्नी को दोष लगता है और इसके अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं. 
 7. संयम रखें व्रती (व्रत करने वाला) को चाहिए कि वह तपस्वियों के समान व्यवहार करे। अर्थात कम बोले, किसी की निंदा या विवाद न करे, मन पर संयम रखें आदि।

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