पांच दिन के त्योहार की शुरूआत 22 से, एक ही खबर में पढ़ें मुहूर्त और पूजन के नियम
Diwali 2022: पांच दिन के त्योहार की शुरूआत 22 से, एक ही खबर में पढ़ें मुहूर्त और पूजन के नियम
Diwali 2022 समय पर करें पूजन मिलेगी सुख-समृद्धि। दीपावली के पांच दिवसीय त्योहारों की श्रृंखला 22 से। दीपावली पर विधि-विधा से मां लक्ष्मी गणेशजी की जाती है पूजा। 25 को सूर्य ग्रहण होने के कारण गोवर्धन पूजा 26 को होगी।
पांच दिवसीय दीपावली Diwali के त्योहारों की श्रृंखला 22 अक्टूबर से शुरू हो रही है। दीपावली पर लक्ष्मीजी-गणेशजी की विधि-विधान से पूजा करने से सुख-समृद्धि होती है। दीपावली की तैयारियां बाजार से घर तक शुरू हो चुकी हैं। दीपावली का वर्ष भर लोगों को इंतजार रहता है। धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, यम द्वितीया के पर्व मनाए जाते हैं। मुख्य पर्व दीपावली 24 अक्टूबर को है। इस दिन मां लक्ष्मी की कृपा पाने को विधि-विधान से पूजन किया जाता है। घरों को सजाया-संवारा जाता है। दीपावली की घर से लेकर बाजार तक तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ज्योतिषाचार्य अजय तैलंग बताते हैं कि दीपावली पर विधि-विधान से पूजन करना चाहिए। 25 अगस्त को सूर्य ग्रहण होने के कारण कोई पर्व नहीं मनाया जा सकेगा।
धनतेरस 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन चिकित्सक भगवान धन्वंतरि की भी पूजा करते हैं। लोग धनतेरस को नए बर्तन भी खरीदते हैं और धन की पूजा भी करते हैं। पूजा का शुभ समय शाम 7.01 बजे से रात 8.17 बजे तक है।
नरक चतुर्दशी 23 अक्टूबर को मनाई जाएगी। नरक से डरने वाले मनुष्यों को चंद्रोदय के समय स्नान करना चाहिए। सुबह तेल मालिश कर स्नान करने से रूप संवरता है। यमलोक के दर्शन नहीं करने पड़ते हैं। नरकासुर की स्मृति में चार दीपक भी जलाने चाहिए। नरक चतुर्दशी 23 अक्टूबर को शाम 6.03 बजे से शुरू होकर 24 अक्टूबर को शाम 5.27 बजे तक रहेगी। काली चौदस पर मां काली की रात्रि में पूजा का विधान है। दीपावली Diwali
दीपावली 24 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। कुबेर की पूजा भी की जाती है। कलम व लेखनी की जाती है। बही, लाकर की पूजा होती है। दीपकों को देवस्थान, तुलसी, जलाशय, आंगन, सुरक्षित स्थान, गोशाला आदि मंगल स्थानों पर लगाना चाहिए। आतिशबाजी कर लक्ष्मीजी को प्रसन्न करना चाहिए। धन की देवी का वास वहीं होता है, जहां प्रकाश और स्वच्छता पर जोर दिया जाता है। पूजा का शुभ समय शाम 7.02 बजे से रात 8. 23 बजे तक रहेगा। शाम 5.50 बजे से रात 8.58 बजे तक भी पूजा की जा सकेगी। रात में 11.30 बजे से 1.30 बजे तक पूजा की जा सकती है।
गोवर्धन पूजा Govardhan Puja
कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा या अन्नकूट महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। गाय, बछड़ों, बैलों की पूजा की जाती है। महिलाएं शुभ मुहूर्त में घर आंगन में गोबर से गोवर्धन बनाकर कृष्ण सहित उनकी पूजा करती हैं। गोवर्धन पूजा 26 को की जाएगी। पूजा सुबह 6.29 से सुबह 8.43 बजे तक की जा सकेगी। शाम को गोवर्धन पूजा 6.10 बजे से रात 8.40 बजे तक की जा सकेगी। यम द्वितीय Bhai Dooj
यम द्वितीय पर सुबह चंद्रमा के दर्शन करने चाहिए। यमुना किनारे रहने वाले लोगों को यमुना स्नान करना चाहिए। यम द्वितीया के दिन यमुना ने यम को अपने घर भोजन करने बुलाया था, इसीलिए इसे यम द्वितीया कहा जाता है। बहन भाई के माथे पर तिलक कर लंबी उम्र की प्रार्थना करती है। शाम को दीपदान करने का भी पुराणों में विधान है। जहां पर लोग उदया तिथि को मानते हैं, वहां पर 27 अक्टूबर को भाई दूज की पूजा कर सकते हैं। शुभ मुहूर्त सुबह 11. 07 बजे से दोपहर 12. 46 तक रहेगा।
पंचोत्सव की दस्तक द्वार पर हो चुकी है। कल यानी शनिवार को पंच दिन के उत्सव की शुरूआत धनतेरस के साथ होगी। ये बात और है कि सूर्य ग्रहण के कारण पांच दिन तक लगातार चलने वाला उत्सव इस बार छह दिन तक रहेगा। बात करते हैं धनतेरस के पर्व की।
धर्म वैज्ञानिक पंडित वैभव जोशी के अनुसार हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस पर्व मनाया जाता है। इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा का विधान है। इसके अलावा धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज की पूजा भी की जाती है।
धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन जिस भी वस्तु की खरीदारी की जाएगी उसमें 13 गुणा वृद्धि होगी। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान धनवंतरी का जन्म हुआ था इसलिए इसे धनतेरस के त्योहार के रुप में मनाया जाता है।
धनतेरस का महत्व
शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी समुद्र मंथन के दौरान हाथों में अमृत से भरा स्वर्ण कलश लेकर प्रकट हुए थे। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान धनवंतरी ने कलश में भरे हुए अमृत को देवताओं को पिलाकर अमर बना दिया था। धनवंतरी के जन्म के उपलक्ष्य में ही धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धनवंतरी के जन्म के दो दिनों बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुई इसलिए दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
धनतेरस से जुड़ी अन्य मान्यता
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन देवताओं के शुभ कार्य में बाधा डालने पर भगवान विष्णु ने असुरों के गुरू शुक्राचार्य की एक आंख फोड़ दी थी। कथा के अनुसार देवताओं को राजा बलि के भय से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया। शुक्राचार्य ने वामन रूप में भगवान विष्णु को पहचान लिया और राजा बलि से आग्रह किया कि वामन कुछ भी मांगे तो उन्हें मना कर देना। लेकिन बलि ने शुक्राचार्य की बात नहीं मानी। वामन भगवान द्वारा मांगी गई तीन पग भूमि दान करने के लिए कमण्डल से जल लेकर संकल्प लेने लगे। बलि को दान करने से रोकने के लिए शुक्राचार्य राजा बलि के कमण्डल में लघु रूप धारण करके प्रवेश कर गए। तब भगवान वामन ने अपने हाथ में रखे हुए कुशा को कमण्डल में ऐसे रखा कि शुक्राचार्य की एक आंख फूट गई। इसके बाद राजा बलि ने संकल्प लेकर तीन पग भूमि वामन भगवन को दान कर दी। इस तरह बलि के भय से देवताओं को मुक्ति मिल गई और बलि ने जो धन.संपत्ति देवताओं से छीन ली थी उससे कई गुणा धन- संपत्ति देवताओं को फिर से प्राप्त हो गई। इस कारण से भी धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है।
धनतेरस पूजा विधि
धनतेरस को संध्या के समय शुभ मुहूर्त में उत्तर दिशा में मां लक्ष्मी, भगवान धनवंतरी और कुबेर जी की स्थापना करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं और चंदन का तिलक लगाएं। पूजा के समय कुबेर जी के मंत्र ओम ह्रीं कुबेराय नमः का 108 बार जाप करें और धनवंतरी स्तोत्र का पाठ करें। इस दिन कुबेर जी को सफेद मिठाई और धनवंतरी को पीली मिठाई का भोग लगाना शुभ माना जाता है। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन भी अवश्य करें। मां लक्ष्मी के समक्ष भी दीपक जलाएं और तिलक लगाएं। मां लक्ष्मी और गणेश जी को फल, फूल, मिठाई अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की आरती उतारें।
इन चीजों करें जरूर खरीददारी
1− धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन लक्ष्मी.गणेश की मूर्ति खरीदें और दीपावली के दिन इसी का पूजन करें।
2− धनतेरस के दिन सोने व चांदी की वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाऐं सोने- चांदी के आभूषण खरीदती हैं लेकिन यदि आपकी जेब अनुमति ना दे तो आप सोने या चांदी का सिक्का भी खरीद सकते हैं।
3− इस दिन धातु के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। विशेषकर चांदी और पीतल को भगवान धन्वंतरी का मुख्य धातु माना जाता है। धनतेरस के दिन चांदी या पीतल के बर्तन खरीदने चाहिए।
4− मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान हाथ में कलश लेकर जन्मे थे। इसलिए धनतेरस के दिन पानी भरने वाला बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है।
5− धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन झाड़ू खरीदने से घर से दरिद्रता और नकारत्मक ऊर्जा दूर होती है।
6− मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन दक्षिणवर्ती शंख, कमलगट्टे की माला, धार्मिक साहित्य या रुद्राक्ष की माला खरीदना शुभ माना जाता है।
7− धनतेरस के दिन प्राणप्रतिष्ठित रसराज पारद श्री यंत्र घर में लाना बेहद शुभ होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन श्रीयंत्र खरीदने से मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और घर में सुख.समृद्धि बनी रहती है।
Surya Grahan 2022: 27 साल बाद दिवाली पर सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल और शहर के हिसाब से ग्रहण का समय
साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण दिवाली के अगले दिन ही लगने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। ऐसा सूर्य ग्रहण करीब 27 साल बाद दोबारा लग रहा है। बता दें कि साल 1995 में भी दिवाली के अगले दिन ही सूर्य ग्रहण पड़ा था। जानिए सूर्य ग्रहण का सूतक काल, समय और किन शहरों में किस समय दिखेगा ग्रहण।
सूर्य ग्रहण 2022 समय
सूर्य ग्रहण आरंभ- 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 29 मिनट से शुरू
सूर्य ग्रहण समाप्त- 5 बजकर 42 मिनट तक
सूर्य ग्रहण 2022 का सूतक काल
सूतक काल का प्रारंभ: 25 अक्टूबर को सुबह 03 बजकर 17 मिनट से शुरू
सूतक काल का समापन: 25 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 42 मिनट पर
सूर्य ग्रहण पर 27 साल बाद ऐसा संयोग
दिवाली के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण रहा है। बिल्कुल ऐसा ही ग्रहण आज से 27 साल पहले 24 अक्टूबर 1995 को लगा था। उस समय भी सूर्य ग्रहण तुला राशि में था और इस बार भी इसी राशि में लग रहा है।
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Surya Grahan 2022: 27 साल बाद दिवाली पर सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल और शहर के हिसाब से ग्रहण का समय
SHIVANI SINGH
Publish Date: Fri, 21 Oct 2022 01:36 PM (IST)
Updated Date: Fri, 21 Oct 2022 01:36 PM (IST)
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Surya Grahan 2022: 27 साल बाद दिवाली पर सूर्य ग्रहण, जानिए सूतक काल और समय
Surya Grahan 2022 दिवाली के बाद लगने वाला ये सूर्य ग्रहण काफी खास माना जा रहा है। एक और जहां दिवाले के दूसरे दिन ही लग रहा है। इसके साथ ही ग्रहों की स्थिति भी 27 साल पहले जैसी ही है। जानिए सूर्य ग्रहण का सूतक काल।
नई दिल्ली, Surya Grahan 2022: साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण दिवाली के अगले दिन ही लगने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सूर्य ग्रहण लगने वाला है। ऐसा सूर्य ग्रहण करीब 27 साल बाद दोबारा लग रहा है। बता दें कि साल 1995 में भी दिवाली के अगले दिन ही सूर्य ग्रहण पड़ा था। जानिए सूर्य ग्रहण का सूतक काल, समय और किन शहरों में किस समय दिखेगा ग्रहण।
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सूर्य ग्रहण 2022 समय
सूर्य ग्रहण आरंभ- 25 अक्टूबर को शाम 4 बजकर 29 मिनट से शुरू
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सूर्य ग्रहण 2022 का सूतक काल
सूतक काल का प्रारंभ: 25 अक्टूबर को सुबह 03 बजकर 17 मिनट से शुरू
सूतक काल का समापन: 25 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 42 मिनट पर
सूर्य ग्रहण पर 27 साल बाद ऐसा संयोग
दिवाली के अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण रहा है। बिल्कुल ऐसा ही ग्रहण आज से 27 साल पहले 24 अक्टूबर 1995 को लगा था। उस समय भी सूर्य ग्रहण तुला राशि में था और इस बार भी इसी राशि में लग रहा है।
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कहां-कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
मुख्य रूप से यूरोप, उत्तर-पूर्वी अफ्रीका और पश्चिम एशिया के कुछ हिस्सों से दिखाई देगा। इसके अलावा भारत में सूर्य ग्रहण नई दिल्ली, बेंगलुरु, कोलकाता सहित कुछ जगहों पर दिखाई दे सकता है।
किस शहर में कब दिखेगा सूर्य ग्रहण
नई दिल्ली- 25 अक्टूबर को शाम 04:28 से शुरू होकर 05:42 बजे तक
लखनऊ- शाम 04 बजकर 36 मिनट से शाम 05 बजकर 29 मिनट तक
मुंबई- शाम 04 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर 06 बजकर 09 मिनट पर समाप्त
कोलकाता- शाम 04:51 से शुरू होकर 05:04 मिनट पर समाप्त
चेन्नई- शाम 05 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर 05 बजकर 45 मिनट पर समाप्त
भोपाल- शाम 04 बजकर 42 मिनट से 05 बजकर 47 मिनट को समाप्त होगा।
पटना- शाम 04 बजकर 42 मिनट से शुरू होकर 05 बजकर 14 मिनट तक
हैदराबाद- शाम 04 बजकर 58 मिनट से लेकर 05 बजकर 48 मिनट तक
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण दीपावली के बाद, 26 को मनाया जाएगा गोवर्धन पूजा और भाईदूज
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण दीपावली के बाद, 26 को मनाया जाएगा गोवर्धन पूजा और भाईदूज
दीपावली के अगले दिन जब आप उठेंगे, तो सूर्य ग्रहण का सूतक शुरू हो चुका होगा। दरअसल इस बार 25 अक्टूबर को साल का दूसरा और आखिरी सूर्यग्रहण लग रहा है। दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। अगर अमावस्या तिथि की बात करें तो वह 24-25 अक्टूबर को दोनों दिन रहेगी।
अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 5.27 बजे शुरू हो रही है, जो 25 अक्टूबर दोपहर 4:18 बजे तक रहेगी। सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर मंगलवार को लगेगा। सामान्य तौर पर दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। परंतु इस बार सूर्य ग्रहण के कारण गोवर्धन पूजा, अन्नकूट, भाईदूज 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
भारत में दिखेगा सूर्य ग्रहण
ज्योतिषाचार्य डा. पुनीत गुप्ता के अनुसार यह ग्रहण ग्रस्तास्त खंडग्रास सूर्य ग्रहण है। भारतीय समय के अनुसार 25 अक्तूबर को ग्रहण का प्रारंभ:- दोपहर 2.29, ग्रहण का मध्य- 4.30 सायं, ग्रहण की समाप्ति- 6.32 सायं पर अरब सागर में खत्म होगा। लुधियाना शहर की बात करें तो भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर मंगलवार को दोपहर 4.22 मिनट से शाम 5.42 मिनट तक यानी लगभग 1 घंटा 20 मिनट रहेगा।
सूतक काल में न करें मांगलिक कार्य
ज्योतिषाचार्य राहुल हांडा के अनुसार ग्रहण लगने से पहले के समय को अशुभ माना जाता है और इसे ही सूतक काल कहते हैं। सूतक काल में कोई भी मांगलिक काम नहीं होते। न ही किसी व्यक्ति को इस समय में नए काम शुरू करना चाहिए। सूतक काल में न ही खाना बनाएं और न ही खाना बनाएं। अगर खाना बना हुआ रखा है तो उसमें कुशा घास या तुलसी के पत्ते डालकर रखें। सूतक काल में दांतों की सफाई, बालों में कंघी नहीं करने और नाखुन काटने की भी मनाही होती है। सूतक काल में मंदिर के कपाट बंद कर देने चाहिए।
तुला राशि और नक्षत्र के जातक रखें ध्यान
ज्योतिष नीतिश वर्मा के अनुसार खंडग्रास सूर्य ग्रहण कार्तिक अमावस्या दिन मंगलवार स्वाति नक्षत्र में प्रीति योग का तुला राशि में घटित हो रहा है। अत: इस राशि एवं नक्षत्र में पैदा हुए जातकों को विशेष ध्यान रखना होगा। इस राशि वालों को ग्रहण में विशेष रूप से दान, जाप, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्यअष्टक आदि का पाठ करना चाहिए।
सूर्यग्रहण की कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है। ऐसा माना जाता है कि प्राचीन काल में देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, जिसमें 14 रत्न निकले। समुद्र मंथन में जब अमृत निकला तो देवताओं और दानवों के बीच युद्ध होने लगा। तब श्री हरि ने मोहिनी अवतार धारण किया और और देवताओं को अमृत पान करवाने लगे। उस समय राहु नाम के असुर ने भी देवताओं का वेश धारण करके अमृत पान कर लिया।
चंद्र और सूर्य ने राहु को पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया। तब विष्णु ने क्रोधित होकर राहु का सिर धड़ से अलग कर दिया। राहु ने भी अमृत पान किया था इसलिए वह अमर हो गया। तभी से राहु चंद्र और सूर्य को अपना शत्रु मानता है। सूर्य और चंद्र ग्रहण के दिन उन्हें प्रभावित करता है।
प्रदोष काल में पूजन बेहद शुभ
वैदिक ज्योतिष संस्थान के प्रमुख स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी जी महाराज ने दीपावली तिथि की जानकारी देते हुए बताया कि विपुलता, माधुर्य, श्री एवं सौन्दर्य की अधिष्ठात्री महादेवी लक्ष्मी की पूजा तथा ज्योति का पावन पर्व है। दीपावली काम-क्रोध-लोभ-मोह के रूप में जो अंधकार अन्तः में स्थित है, उसे दूर कर अन्तर्मन को आलोकित करने की क्षमता मां लक्ष्मी ही की कृपा से भक्त को प्राप्त होती है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण अमावस्या सोमवार, 24 अक्टूबर को सायं 05:27 मिनट से आरंभ होकर 25 अक्टूबर मंगलवार को सायं 04:16 मिनट तक विद्यमान रहेगी। यद्यपि अमावस्या की उदयातिथि 25 अक्टूबर को है, परंतु अमावस्या तिथि का प्रदोष काल 24 अक्टूबर को ही है। दीवाली का पूजन प्रदोष काल काल में करना बेहद शुभ माना जाता है।
दीपावली 24 को ही मनाई जाएगी
ब्रह्मपुराण में प्रदोष काल से लेकर निशीथकाल तक रहने वाली अमावस्या को श्रेष्ठ कहा गया है। अतः दीपावली पर्व 24 अक्टूबर सोमवार को ही निर्विवाद रूप से सारे देश में मनाया जाएगा। वहीं नरक चतुर्दशी अर्थात छोटी दीवाली एवं धनतेरस 23 अक्टूबर रविवार को 25 अक्टूबर को सूर्यग्रहण होने की वजह से गोवर्धन पूजा 26 अक्टूबर एवं भैया दूज 27 को मनायी जायेगी।
महामंडलेश्वर स्वामी श्री पूर्णानंदपुरी महाराज ने दीवाली के शुभ मुहूर्त की पूजा के लाभ एवं व्यवसाय से संबंधित जानकारी देते हुए बताया कि हस्त नक्षत्र दोपहर 02:41 मिनट तक होगा। इसके उपरांत दीपावली पूजा में विहित चित्रा नक्षत्र होगा। हस्त चित्रा नक्षत्र में वैधृति योग का संयोग सुखद रहेगा। हस्त नक्षत्र लघु छित्र संज्ञक और चित्रा मृदु मैत्र संज्ञक है। ये दोनों नक्षत्र व्यापारी और उद्योगपति जगत को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे। इस दिन प्रातः 08:20 मिनट से 10:38 मिनट तक वृश्चिक तथा 12:40 मिनट तक धनुः लग्न रहेगा। वृश्चिक लग्न पर देवगुरु बृहस्पति की नवम दृष्टि और धनु: को ग्रह मंगल संपूर्ण दृष्टि से देखता है। वृश्चिक लग्न में ऑटो-मोबाइल वर्कशॉप, तांबा, पीतल, कांसा एवं स्टील का व्यवसाय करने वाले व्यक्ति महालक्ष्मी पूजन करें तो विशेष लाभ होगा।
पूजन के लिए सही समय
कुछ व्यापारी दीपावली पूजन के लिए धनु: लग्न को श्रेष्ठ मानते हैं, क्योंकि धनुः लग्न का स्वामी शुभ ग्रह है। पूर्वाह्न 12:43 मिनट से 02:26 मिनट तक मकर लग्न रहेगा। मकर लग्न में ही अभिजित मुहूर्त भी है। मकर लग्न में स्वगृही शनि और तृतीय स्वगृही देवगुरु बृहस्पति विराजमान होने से लग्न अत्यन्त बलवती समझी जाएगी। इसमें लाभ का चौघड़िया और भी उत्तम है। अभिजित मुहूर्त और लाभ का चौघड़िया चार्टर्ड एकाउंटेन्टों, वकीलों, प्रॉपर्टी डीलरों को अकूत लाभ देने वाला है। अपराह्न 03:50 मिनट तक कुंभ और 04:58 मिनट तक मीन लग्न रहेगा। मीन लग्न का स्वामी देवगुरु बृहस्पति अपने घर में बैठकर तत्काल प्रभाव से उद्योग-धन्धों में दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति कराएगा। इस लग्न में पूजा करने वाले यजमान व कराने वाले द्विजाचार्य भी मालामाल होंगे। मीन लग्न में विशेषकर तेजी मंदी का व्यापार करने वालों, फाइनेंसरों और बैंक वालों को पूजा करनी चाहिए।
दिन एवं रात्रि का संयोग
सायंकाल 04:58 मिनट से 06:50 मिनट तक मेष लग्न रहेगी, इसमें चर का चौघड़िया की उपलब्धि मनोकामना पूर्ति में सहायक रहेगी। स्वामी जी ने बताया कि सांय 5:39 मिनट से रात्रि 8:15 मिनट तक प्रदोषकाल अर्थात दिन एवं रात्रि का संयोग रहेगा जिसमें दिन विष्णुरूप और रात्रि लक्ष्मीरूपा है। प्रदोषकाल में महालक्ष्मी पूजन का सर्वाधिक महत्व होता है। प्रदोषकाल में ही मेष, वृष लग्न और अमृत चर के चौघड़िया भी विराजमान रहेंगे, प्रदोष काल के स्वामी आशुतोष भगवान सदाशिव स्वयं हैं। इसमें चित्रा नक्षत्र से बना मृदु मैत्र संज्ञक योग व्यापारियों व गृहस्थियों के लिए दीपावली, महालक्ष्मी, कुबेर, दवात-कलम, तराजू, बाट, तिजोरी इत्यादि पूजन के लिए अक्षय श्रीप्रद एवं कल्याणकारी सिद्ध होगा। अपनी आस्था व सुविधानुसार किसी शुभ लग्न, शुभ चौघड़िया, महानिशीथकाल और सिंह लग्न में महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए। अर्धरात्रि लग्न सिंह 01:27 मिनट से 03:27 मिनट तक तक रहेगी। यह भी व्यापार में विपुल लाभ और लक्ष्मी की स्थिर प्रीति कराने वाली है।
प्रत्येक वर्ष कार्तिक महीने की अमावस्या तिथि को प्रकाश का पर्व दीवाली मनाया जाता है। इस दिन प्रभु श्रीराम लंकापति रावण पर विजय प्राप्त करके अयोध्या लौटे थे उनके 14 वर्ष वनवास के बाद अयोध्या वापस आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाकर खुशी मनायी। इस बार दीवाली पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है, सूर्यग्रहण लगने के कारण भाई दूज और गोवर्धनपूजा में परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
सूर्य ग्रहण की वजह से इस बार पंच दिवसीय दीपावली पर्व छह दिनों में होगा।
Diwali 2022 ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्णेय कहते हैं कि परंपरा व तिथि के अनुसार दीपवली के दूसरे यानी अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। हालांकि इस बार ऐसा नहीं है। दीपावली के दूसरे दिन यानी 25 अक्टूबर की सुबह 4.31 बजे से सूतक लग जाएगा।
चंद्रमा आंशिक रूप से कुछ वक्त के लिए सूर्य को ढके हुए दिखाई देगा। भारत में सूर्य का करीब आधा हिस्सा चंद्रमा से ढका होगा। पं. रामदत्त संस्थापित पंचांग में अल्मोड़ा में ग्रहण का स्पर्श अपराह्न 2:28 बजे, मध्य शाम 4:30 बजे व मोक्ष 5:27 बजे बताया गया है। धार्मिक दृष्टिकोण से ग्रहण के मध्य से 12 घंटे पहले उसका सूतक लग जाता है। सूतक काल में मांगलिक कार्य वर्जित रहते हैं।
प्रयागराज, जागरण संवाददाता। पंच दिवसीय दीपावली उत्सव इस बार छह दिन का होगा। पहला पर्व धनतेरस का कल शनिवार 22 अक्टूबर को होगा। आइए जानें इन छह दिनों में पांच त्योहार कौन-कौन से हैं और उन्हें कब मनाया जाएगा। धनतेरस, नरक चतुदर्शी, हनुमान जयंती, दिवाली, लक्ष्मी-गणेश पूजन, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, कलम दावात पूजा की तिथि की जानकारी आप भी लें।
गोवर्धन पूजन, अन्नकूट व भाई दूज 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा : ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्णेय कहते हैं कि परंपरा व तिथि के अनुसार दीपावली के दूसरे यानी अगले दिन गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है। हालांकि इस बार ऐसा नहीं है। दीपावली के दूसरे दिन यानी 25 अक्टूबर की सुबह 4.31 बजे से सूतक लग जाएगा। वहीं शाम 4.40 बजे से 6.32 बजे तक आंशिक सूर्य ग्रहण रहेगा। इस वजह से 25 अक्टूबर के दिन कोई त्योहार नहीं मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अन्नकूट का भोग भी नहीं लगे सकेगा। बोले कि गोवर्धन पूजा, अन्नकूट और भाई दूज का पर्व 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा। उस दिन दोपहर में 2.42 बजे द्वितीया तिथि लग जाएगी।
इस बार अमावस्या की तिथि दो दिन : दीपावली का त्योहार अमावस्या तिथि पर होता है। इस बार कार्तिक अमावस्या 24 व 25 अक्टूबर को होगा। यानी दाेनों दिन इसका मान रहेगा। बता दें कि अमावस्या की तिथि 24 अक्टूबर की शाम को 5.04 मिनट से शुरू होगी और इसका मान 25 अक्टूबर की शाम 4.18 बजे तक रहेगा। ज्योतिर्विदों के अनुसार लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए कार्तिक अमावस्या में प्रदोष काल और अर्धरात्रि व्यापिनी होना शुभ होता है। इस कारण दीपावली 24 अक्टूबर को मनेगी।
ज्योतिर्विद क्या कहते हैं : ज्योतिषाचार्य आशुतोष वाष्णेय ने इस संबंध में आवश्यक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी पूजन स्थिर लग्न में करना शुभ होता है। इससे वर्ष भर मां लक्ष्मी की कृपा बरसती है। उन्होंने बताया कि इस बार स्थिर वृष लग्न शाम 6.55 से रात 8.51 बजे तक है। इसके अलावा सिंह लग्न रात 1.23 बजे से 3.37 बजे तक होगी।
नई दिल्ली, डिजिटल डेस्क | Laxmi Narayan Yoga: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे सभी राशियों के जीवन में सकारात्मक व नकारात्मक बदलाव आते हैं। ज्योतिष पंचांग के अनुसार साल 2022 के अक्टूबर मास की 26 वीं तिथि के दिन अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है। जिसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ेगा।
बता दें कि 26 अक्टूबर 2022 के दिन बुध ग्रह कन्या राशि से प्रस्थान कर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। यह भी जानना जरूरी है कि 18 अक्टूबर के दिन शुक्र ग्रह भी तुला राशि में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसे में बुध और शुक्र के युति के कारण लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। लक्ष्मी नारायण राजयोग के कारण 3 ऐसी राशियां है जिन्हें सर्वाधिक लाभ प्राप्त होगा। आइए जानते हैं-
लक्ष्मी नारायण योग से इन तीन राशियों को मिलेगा लाभ (Lakshmi Narayan Yog 2022)
कन्या राशि: लक्ष्मी नारायण राजयोग के कारण कन्या राशि के जातकों को बहुत लाभ मिलेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस शुभ राजयोग के कारण कन्या राशि के जातक कर्ज से जल्द मुक्त हो जाएंगे और सम्भावना अधिक है कि दिया हुआ कर्ज भी आपको वापस मिल जाएगा। इसके साथ व्यापार क्षेत्र से जुड़े लोगों को अचानक धनलाभ होगा इसकी सम्भावना भी अधिक है। नौकरी पेशा लोगों को भी धन कमानें के नए साधन मिलेंगे और उन्हें अपने क्षेत्र में सफलता मिलेगी।
धनु राशि: धनु राशि के जातकों के लिए भी लक्ष्मी नारायण योग बहुत लाभदायक साबित होने वाला है। ज्योतिष विद्वान बताते हैं कि धनु राशि के जातकों की आय में वृद्धि होगी साथ ही उन्हें जल्द शुभ समाचार प्राप्त होगा। इसके साथ व्यापर के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी सफलता मिलेगी इसकी सम्भावना अधिक है। घर परिवार में खुशी का माहौल बना रहेगा।
मकर राशि: लक्ष्मी नारायण योग का शुभ प्रभाव मकर राशि के जातकों पर भी पड़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इस राशि के जातकों को नौकरी, व्यापार के क्षेत्र में सफलता मिलेगी इसके संकेत मिल रहे हैं। साथ ही वह उन्नति भी प्राप्त कर सकते हैं। अटका हुआ धन भी जल्द प्राप्त होगा इस बात की सम्भावना भी अधिक है। साथ ही परिवार के साथ-साथ सहकर्मियों में भी खुशी का माहौल बना रहेगा।
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