शरद पूर्णिमा🌙 पर खीर का महत्व*

🌝 *शरद पूर्णिमा🌙 पर खीर का महत्व*

(शरद पूर्णिमा 30 अक्टूबर, शुक्रवार को है)
🌙 *चंद्रमा से बरसता है अमृत*
शरद पूर्णिमा (गड़बड़े) से जुड़ी कई मान्यताएं हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें विशेष अमृतमयी गुणों से युक्त रहती हैं, जो कई बीमारियों का नाश कर देती हैं। यही कारण है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग अपने घरों की छतों पर खीर रखते हैं, जिससे चंद्रमा की किरणें उस खीर के संपर्क में आती है, इसके बाद उसे खाया जाता है। कुछ स्थानों पर सार्वजनिक रूप से खीर का प्रसाद भी वितरण किया जाता है।

🙏🏻 *भगवान श्रीकृष्ण ने रचाया था रास*
शरद पूर्णिमा से जुड़ी एक मान्यता यह भी है कि इस दिन माता लक्ष्मी रात्रि में यह देखने के लिए घूमती हैं कि कौन जाग रहा है और जो जाग रहा है महालक्ष्मी उसका कल्याण करती हैं तथा जो सो रहा होता है वहां महालक्ष्मी नहीं ठहरतीं। शरद पूर्णिमा को रासलीला की रात भी कहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को ही भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ रास रचाया था। 

🍚 *खीर खाने का है महत्व*
शरद पूर्णिमा की रात का अगर मनोवैज्ञानिक पक्ष देखा जाए तो यही वह समय होता है जब मौसम में परिवर्तन की शुरूआत होती है और शीत ऋतु का आगमन होता है। शरद पूर्णिमा की रात में खीर का सेवन करना इस बात का प्रतीक है कि शीत ऋतु में हमें गर्म पदार्थों का सेवन करना चाहिए क्योंकि इसी से हमें जीवनदायिनी ऊर्जा प्राप्त होगी।

🌷 *आरोग्य व पुष्टि देनेवाली खीर* 🌷
🍚 शरद पूनम की रात को आप जितना दूध उतना पानी मिला कर आग पर रखो और खीर बनाने के लिए उसमें यथायोग्य चावल तथा शक्कर या मिश्री डालो | पानी बाष्पीभूत हो जाय, केवल दूध और चावल बचे, बस खीर बन गयी | जो दूध को जला कर तथा रात को बादाम, पिस्ता आदि डाल के खीर खाते हैं उनको तो बीमारियाँ का सामना करना पड़ता है | उस खीर को महीन सूती कपड़े, चलनी या जाली से अच्छी तरह ढककर चन्द्रमा की किरणों में पुष्ट होने के लिए रात्रि 9 से 12 बजे तक रख दें | बाद में जब खीर खायें तो पहले उसे देखते हुए 21 बार ‘ॐ नमो नारायणाय |’ जप कर लें तो वह औषधि बन जायेगी | इससे वर्षभर आपकी रोगप्रतिकारक शक्ति की सुरक्षा व प्रसन्नता बनी रहेगी |

🌙 इस रात को हजार काम छोडकर कम-से-कम 25 मिनट चन्द्रमा की किरणों का फायदा लेना, ज्यादा लो तो हरकत नहीं | छत या मैदान में विद्युत् का कुचालक आसन बिछाकर चन्द्रमा को एकटक देखना | अगर मौज पड़े तो आप लेट भी सकते हैं | श्वासोच्छ्वास के साथ भगवन्नाम और शांति को भरते जायें, नि:संकल्प नारायण में विश्रांति पायें |
श्री बिहारी जी महाराज का शरदोत्सव 30/10/2020 को है इस दिन श्री बिहारी जी महाराज भव्य स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होकर हाथों में मुरली एंव छडी मस्तक पर मोर मुकुट कमर में कटकाछिनी विशेष रूप से धारण करते हैं निकुंज लताओं में सखिऑ के साथ महारास की छवि का भव्य दर्शन होता है।महारास की छवि का दर्शन सुबह 8 बजे से 1 बजे तक और सांय 5 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक रहेगा।शरद पूर्णिमा (शरदोत्सव) पर खीर एंव चन्द्रकला का विशेष भोग लगता है ।
       
       11श्री कुंज बिहारी 11
पूरीपूरी पूरणमासी पूर्यौ पूर्यौ शरद को चंदा।
पूर्यौ है मुरली स्वर केदारो कृष्ण कला संपूरण भामिनी
रास रच्यौ सुख कंदा॥ 

ठाकुर श्री बाँकेबिहारी मंदिर 
श्रीधाम वृन्दावन
            श्रीहरिदास🙏🏻🌹🙏🏻🌹
श्री बिहारी जी महाराज का शरदोत्सव 30/10/2020 को है इस दिन श्री बिहारी जी महाराज भव्य स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान होकर हाथों में मुरली एंव छडी मस्तक पर मोर मुकुट कमर में कटकाछिनी विशेष रूप से धारण करते हैं निकुंज लताओं में सखिऑ के साथ महारास की छवि का भव्य दर्शन होता है।महारास की छवि का दर्शन सुबह 8 बजे से 1 बजे तक और सांय 5 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक रहेगा।शरद पूर्णिमा (शरदोत्सव) पर खीर एंव चन्द्रकला का विशेष भोग लगता है ।
       
       11श्री कुंज बिहारी 11
पूरीपूरी पूरणमासी पूर्यौ पूर्यौ शरद को चंदा।
पूर्यौ है मुरली स्वर केदारो कृष्ण कला संपूरण भामिनी
रास रच्यौ सुख कंदा॥ 

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