कार्तिक मास के व्रत और त्यौहार

कार्तिक  मास के व्रत और त्यौहार

यदि ायदि आप पूरे कार्तिक माह में व्रत करते हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

इस पूरे माह किसी दूसरे का दिया हुआ भोजन न करें। भोजन एक बार सायंकाल में तारे निकलने के बाद ही करें।

पूरे माह ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए मन, वचन और कर्म की शुद्धता रखें।

व्रती को पूरे माह रात्रि में धरती पर शयन करना चाहिए।

इस माह में लौकी, गाजर, नाशपाती, उड़द दाल, मूंग दाल, चना दाल, मटर खाने से बचना चाहिए।

पूरे माह सात्विक भोजन करें। अधिक तला, मसालेदार, मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन न करें।

झूठ बोलना, चोरी करना, पाप कर्म करना, क्रोध करना निषेध है।

भारत में वर्ष के चार माह सभी धर्मो में विशेष त्यौहार चलते रहते हैं. इन सभी त्यौहारों का उद्देश्य ईश्वर के प्रति आस्था एवम प्रेम एकता का भाव जगाना हैं. चौमासे या चातुर्मास के चार महीनो की विशेषता सभी प्रान्तों में अलग-अलग बताई जाती हैं और उसका निर्वाह किया जाता है,  हिंदी कैलेंडर में सबसे अंतिम माह कार्तिक का होता हैं.  कार्तिक में ही बड़े – बड़े त्यौहार मनाये जाते हैं, जो भारत देश के प्रमुख त्यौहारों में से हैं. वैसे तो भारत वर्ष में वर्ष भर ही त्यौहारों का ताता लगा रहता है, लेकिन चार माह के त्यौहार तप एवम पूजा पाठ की दृष्टि से अहम् माने जाते हैं, उसमे कार्तिक माह में भी उपवास, पूजा पाठ एवम ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष महत्व हैं.

Shri Radhey Radhey ji 🙏🙏❤️

🌹🌹क्योंकिस में भगवान ने बहुत सारी लीलाएँ की हैं....जो इस प्रकार हैं...तथा व्रत-त्यौहार है

#1_शरद_पूर्णिमा 
इस दिन भगवान कृष्ण ने राधरानी ओर गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात्रि से ही कार्तिक  मास शुरू हुआ था।

#2_करवा_चौथ - ( संकटी चतुर्थी )

#3_बहुलाष्टमी - 
(अहोई व्रत ) यह दिन राधाकुण्ड श्यामकुण्ड के आविर्भाव  का स्मरणोत्सव है।इसी दिन कृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड ,राधाकुंड का निर्माण किया था ।

#4_रमा_एकादशी

#5_धन्वतंरी_त्रयोदशी - 
इस दिन धन्वतंरी भगवान अमृत ओर आयुर्वेद की ओषधियों के साथ प्रकट हुए थे।

#6_नरकाचतुर्दशी - 
इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।

#7_दामोदर_लीला - 
इसी मास में दिवाली के दिन मैया यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांधा था जिससे उनका नाम दामोदर पड़ा अर्थात जिनका उदर(पेट) दाम (रस्सी) से बंध गया  और इसिलिए कार्तिक मास का नाम #दामोदर_मास पड़ा ।

#8_दीपावली - 
भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे । सभी अयोध्यावासियों ने दिए जलाये जिसे दिवाली के रूप में आज भी हम मानते हैं ।

#9_गोवर्धन_पूजा -
 दिवाली के पश्चात गोवर्धन पूजा की जाती है । भगवान कृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था| इस दिन भगवान को 56भोग लगाये जाते हैं ।

#10_यम_द्वितीया - 
(भाई दूज )

#11_सूर्यषष्ठी या छठ पूजा

#12_गोपाष्टमी - 
भगवान कृष्ण ने गाय चराना शुरू किया ।

#13_आंवला_नवमीं - 
( अक्षय नवमीं )

#14_देवोउत्थान_एकादशी ( प्रबोधनी एकादशी, देवउठनी एकादशी) - 
इस दिन 4 महीनो बाद भगवान उठते हैं । इसिलए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं ।

#15_तुलसी_विवाह - 
भगवान कृष्ण और तुलसी महारानी का विवाह होता हैं ।
     
#16_बैकुण्ठ_चतुर्दशी
 कार्तिक मास में भगवान कृष्ण के आगे संध्या समय दिया अर्पण करने का विशेष महत्व है ।
 इस विषय में पद्म पुराण में कहा गया है....
"कार्तिक मास में मात्र एक दीपक अर्पित करने से भगवान कृष्ण प्रसन्न होते हैं । भगवान कृष्ण ऐसे व्यक्ति का भी गुणगान करते हैं जो दीपक जलाकर अन्यों को अर्पित करने के लिए देते हैं ।" 

 #17_पूर्णिमा स्नान - ( गुरु नानक जयन्ती ) 

 स्कंदपुराण के अनुसार - 
मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः।
तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।’

अर्थात्‌ भगवान विष्णु एवं विष्णुतीर्थ के सदृश ही कार्तिक मास को श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है।
कार्तिक (दामोदर) मास का माहत्म्य

_इस माह में भगवान ने बहुत सारी लीलाएँ की हैं। वे सभी प्रकार हैं~~~_

*_1√ शरद पूर्णिमा~_*
_इस दिन भगवान कृष्ण ने राधारानी ओर गोपियों के साथ रास किया था। शरद पूर्णिमा की रात्रि से ही कार्तिक माह का आरम्भ होता है।_

*_2√ बहुलाष्टमी~_*
_इस दिन राधाकुण्ड व श्यामकुण्ड के आविर्भाव का स्मरणोत्सव है। इसी दिन कृष्ण और राधारानी ने श्यामकुंड, राधाकुंड का निर्माण किया था।_

*_3√ रमा एकादशी~_*
_इस माह जो एकादशी आती है वह भगवती रमा के नाम पर है।_

*_4√ धनतेरस~_*
_इस दिन धन्वतंरी भगवान अमृत और आयुर्वेद की ओषधियों के साथ प्रकट हुए थे।_

*_5√ नरक चतुर्दशी~_*
_इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।_

*_6√ दामोदर लीला~_*
_इसी माह में दिवाली के दिन मैया यशोदा ने भगवान कृष्ण को उखल से बांधा था जिससे उनका नाम दामोदर पड़ा अर्थात जिनका उदर (पेट) दाम (रस्सी) से बंध गया और इसिलिए कार्तिक मास का नाम *दामोदर मास* पड़ा।_

*_7√ दिपावली~_*
_भगवान राम 14 वर्ष के वनवास से अयोध्या लौटे। सभी अयोध्या वासियों ने दियें जलाये जिसे दिवाली के रूप में आज भी हम मानते हैं।_

*_8√ गोवर्धन पूजा~_*
_दिपावाली के पश्चात गोवर्धन पूजा की जाती है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बाएं हाथ की कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किया था। इसी दिन भगवान को 56 भोग लगाये जाते हैं।_

*_9√ गोपाष्टमी~_*
_भगवान कृष्ण ने गाय चराना शुरू किया था।_

*_10√ उत्थान एकादशी (देवउठनी एकादशी)~_*
_इस दिन 4 महीनों बाद भगवान उठते हैं। इसलिए इस एकादशी को देवउठनी एकादशी कहते हैं।_ 

*_11. तुलसी विवाह~_*
_भगवान श्रीकृष्ण और तुलसी महारानी का विवाह होता हैं।_
 
*_12√ दीपदान~_*
_कार्तिक माह में संध्या समय यमुनाजी मैं दीपदान अर्पण करने का विशेष महत्व है। संध्या समय अपने घर पर श्री ठाकुरजी के आगे भी एक दीपक अवश्य जलाएें।_

_कार्तिक मास में इस विषय में *पद्म पुराण* में कहा गया है~ "कार्तिक मास में मात्र एक दीपक अर्पित करने से भगवान श्रीकृष्ण बहुत ही प्रसन्न होते हैं भगवान श्रीकृष्ण ऐसे व्यक्ति का गुणगान भी करते हैं जो दीपदान श्री यमुनाजी मैं करते हैं या नामगोत्र से करवाते हैं।"_

*_स्कंदपुराण के अनुसार~_*

*_‘मासानां कार्तिकः श्रेष्ठो देवानां मधुसूदनः।_*
*_तीर्थ नारायणाख्यं हि त्रितयं दुर्लभं कलौ।’_*

_अर्थात्~भगवान विष्णु एवं विष्णुतीर्थ के सदृश ही कार्तिक मास को श्रेष्ठ और दुर्लभ कहा गया है।_
*🙏🙌 हरे कृष्णा 🙌🙏*
जय श्री राधे...

#करुआ...

यह करूआ स्वामी श्री हरिदास जी महाराज का है, जो की आज से 500 साल से भी ज्यादा पुराना है। जिसका दर्शन साल में एक बार राधा अष्टमी को होता है।

स्वामी जी के सम्प्रदाय में करुआ का बड़ा महत्व है, कहते है कि...

"परम पावन करुआ को पानी।
जाके पीए ह्रदय में आवत मोहन राधिका रानी ।।*

अर्थात- कोई व्यक्ति केवल करुआ का आश्रय ले ले तो, उसको श्यामा श्याम के दर्शन हो जाएंगे। करुआ कौन सा जो ब्रज की रज से बना हो, और उसमे जल कौन सा श्री यमुना जी का जल। बस कोई नित्य करुआ के जल का ही पान करने लगे तो ठाकुर जी किशोरी जी के सहित उसके हृदय में आकर निवास करने लग जाते है।

जय श्री राधे... जय श्री हरिदास...

Comments

Popular posts from this blog

करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी, करवाचौथ व्रत एवं पूजन विधि के साथ।।

कार्तिक माहात्म्य 113 | सांसर्गिक पुण्यसे धनेश्वरका उद्धार; दूसरोंके पुण्य और पापकी आंशिक प्राप्तिके कारण तथा मासोपवास व्रतकी संक्षिप्त विधि

वैशाखमास-माहात्म्य || अध्याय - 06 || भगवत् कथा के श्रवण और कीर्तन का महत्त्व तथा वैशाख मास के धर्मों के अनुष्ठान से राजा पुरुयशा का संकट से उद्धार