राधाष्ट्मी महा महोत्सव

हरे कृष्ण ⚱⚱ श्री राधाष्ट्मी  महा महोत्सव 26 अगस्त को रखिए।
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(_श्रीमती राधारानी के बारे में गर्ग संहिता और ब्रम्ह वैवर्त पुराण में विस्तार से वर्णन है।_)
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ब्रज में आप चले जाए सर्वत्र राधे राधे की ही गूंज है। रिक्शा चालक हो या भक्त वृंद लोग सब राधे राधे बोलते ही मिलेंगे।

🥀"तप्त कंचन गौरांगी, राधे वृंदा वनेसवरि, वृषभानु सुते देवि प्रणमामि हरि प्रिये॥"

 हे श्रीमती राधारानी!
पिघले हुए स्वर्ण के समान रंग वाली, वृंदावन की महारानी, हे महाराज वृषभानु की पुत्री, भगवान श्री कृष्ण प्रिये, हे देवी हम आपको बार बार प्रणाम करते है।

 श्रीमती राधा रानी जी सभी देवियों में श्रेष्ठ है। और वह सभी के लिए पूजनीय  है। वह सभी की संरक्षिका है।
और वह पूरे ब्रह्मांड की माता है।
 _ ( श्री चैतन्य चरितामृत आदि 4.89)

श्रीमती राधारानी भगवान कृष्ण की  शाश्वत संगिनी है। 
करीब 5200 साल पहले, जब भगवान कृष्ण इस धरा धाम पे प्रकट हुए तो उनकी अंतरंगा शक्ति ब्रज मंडल के रावल ग्राम में राजा वृषभानु के यहाँ उनकी लीला में योगदान के लिए प्रकट हुई।
"भद्रपद महीने के शुक्लपछ की अष्ट्मी तिथि को महाराज बृषभानु स्नान करने यमुना जी गए तो वहा कमलपुष्प पे स्वर्ण आभा से घिरी हुई एक नवजात बालिका के दर्शन हुए, बालिका का तेज सूर्य के समान था। पूर्व कई जन्मों में महाराज बृषभानु ने कठिन तप किये थे। हजारो जन्मो के तप के फलस्वरूप श्री कृष्ण प्रिया उनकी पुत्री के रूप में उनको मिली। 
 राजा बृषभानु नवजात बालिका के साथ महल में लौटे, रानी कीर्तिदा की ख़ुशी का क्या कहना। किन्तु यह क्या ये बच्ची तो नयन ही नहीं खोलती।माता दुखी हो गई। पुरे ब्रज में शोर हो गया माता कीर्तिदा के यहाँ सूर्य के समान तेज धारण की हुई पुत्री प्रकट हुई है। 

"भगवान कृष्ण की मां यशोदा,और नन्द बाबा ने सुना कि उनके अत्यंत प्रिय मित्र के घर पुत्री प्रकट हुई तो बधाई देने पहुँच गए अपने नन्हे कान्हा को लेकर। 

राधारानी की प्रतिज्ञा थी की वह अपने नयनो से सर्वप्रथम कमलनयन भगवान श्री कृष्ण के दर्शन करेंगी।
 जब माता यशोदा नन्हे कृष्ण के साथ उनके दर्शन को निकट पहुँची तो अपने प्रभु का आभास पाकर राधारानी ने नयन खोल दिया और बाल कृष्ण के सर्वप्रथम दर्शन किये। पुत्री के नयन खुलते ही माता कीर्तिदा , महाराज बृषभानु सभी व्रजवासी अत्यंत प्रसन्न हो गए। ब्रज में महीनो तक बृषभानु सुता का जन्ममहोत्सव चला। 
__(गर्ग संहिता में इसका वर्णन है )

बृषभानु नन्दनी  श्रीमती राधारानी की जय 🙏
कृष्ण प्रिया श्रीमती राधारानी की जय हो। 

पुराण पुरुष भगवान श्री कृष्ण को समझने के लिए हमें राधारानी के दया पर निर्भर रहना चाहिए। 
इसका उदाहरण बृजवासी है। वह श्री कृष्ण की भक्ति के लिए राधारानी का ज्यादा नाम जप करते है। 
राधारानी अगर कृष्ण से बोले की यह भक्त बहुत अच्छा है_ तो भगवान कृष्ण तुरंत स्वीकार करते है। 
वृंदावन में सभी भक्त भगवान कृष्ण कि तुलना में राधारानी कि महिमा कर रहे है। उनकी पूजा में अधिक रूचि रख रहे है इसका कारण यह है कि, वह गिरा हुआ हो सकता है,मुर्ख हो सकता है किन्तु किसी भी तरह राधारानी को खुश कर सके तो कृष्ण को समझना आसान होगा। 
भक्त जानता है कि श्रीमती राधारानी भक्ति की सर्वोत्तम स्तर पर है। 
राधामहाभाव का अस्वादन के लिए ही स्वमं भगवान कृष्ण श्री कृष्ण चैतन्य के रूप में प्रकट हुए।
भगवान श्री कृष्ण अनन्त है उनकी अन्तरंगा शक्ति दिव्य है। 
__(श्रील प्रभुपाद प्रवचन )

जय राधे 🙏

भगवान कृष्ण को जाने, उनको अपना माने और उनके बताये हुए मार्ग पर चले.....भगवान कृष्ण कि भक्ति करे श्रीमती राधारानी बहुत प्रसन्न होंगी। 

हरि बोल ..

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