मोरकुटी बरसाना

🦚 *मोरकुटी बरसाना...🦚*

*बरसाने में एक छोटा सा स्थान है मोरकुटी।

वृन्दावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय।
यहाँ डाल डाल और पात पात श्री राधे राधे होय।।

इस स्थान कि महिमा बडी ही सुंदर है। एक समय की बात है जब लीला करते हुए श्रीराधा रानी जी प्रभु श्रीकृष्ण से रूठ गयीं और वो रूठ कर मोरकुटी नामक स्थान पर जा के बैठीं। तभी वहां एक मोर आ गया और वे उस मोर से लाड प्यार करने लगी। जब हमारे ठाकुर श्यामसुंदर जी उन्हें मनाने के लिए मोरकुटी पर पधारे तो देखा कि श्रीराधे जू हमसे तो रूठ गयी और उस मोर से प्यार कर रही हैं। कहते हैं कि तब ठाकुर जी को उस मोर से इर्ष्या होने लगी।

वे श्रीराधा रानी को मनाने लगे, तो किशोरी जी ने ये शर्त रख दी कि हे बांकेबिहारी ! मेरी नाराज़गी तब दूर होगी जब तुम इस मोर को नृत्य प्रतियोगिता में हरा कर दिखाओगे।

ठाकुर जी इस बात पर राज़ी हो गए, क्यूंकि कहते हैं कि नन्द के छोरे को तो नाचने का बहाना चाहिए और जब श्रीराधा रानी के सामने नाचने कि बात हो तो कौन पीछे हटे।

प्रतियोगिता प्रारंभ हुई, एक तरफ मोर जो पूरे विश्व में अपने नृत्य के लिए विख्यात हैं और दूसरी ओर हमारे नटवर नागर नन्द किशोर प्रभु उस मयूर से बहुत अच्छा नाचने लगे, पर फ़िर किशोरी जी को लगा कि यदि बांकेबिहारी जीत गए तो बरसाने के मोर किसी को मुंह नहीं दिखा पाएंगे कि स्वयं राधा के गांव के मोर एक ग्वाले से न जीत सके।

इसिलिए किशोरी जी ने अपनी कृपामयी दृष्टि उस मोर पर डाल दी और फ़िर क्या वो मोर ऐसा नाचा कि उसने ठाकुर जी को थका दिया। इस नृत्य को देख आस पास के सभी मोर वहां आकर नृत्य करने लगे। मध्य में श्यामसुंदर और उनको घेर के सभी मोर नृत्य कर रहे हैं। आकाश में घटा और बिजली की चमक के साथ ये नृत्य का दृश्य किस भक्त को पागल नहीं करेगा ! यही तो सच है जिस पर मेरी श्रीराधे जू कृपा दृष्टि डाल दें, वो तो प्रभु को भी हरा सकता है।

जिसने श्रीराधा रानी के प्यार को जीत लिया समझो उसने श्रीकृष्ण जी को भी जीत लिया क्यूंकि ठाकुर जी तो हमारी किशोरी जी के चरणों के सेवक है।

हम यदि अपनी जिह्वा से राधा नाम गाते हैं, तो उसमे हमारा कोई पुरुषार्थ नहीं है, वो तो उनकी कृपा ही है जो हमारे मुख पर उनका नाम आया।

पूरा राधा कहने कि भी आवश्यकता नहीं है, आप अपनी वाणी से कहो केवल "रा"... ये "रा" सुनते ही बांकेबिहारी जी के कान खड़े हो जाते हैं और जब आप आगे बोलते हो "धा"... मतलब आप जब बोलते हो "राधा", तो बांके बिहारी जी के कान नहीं फ़िर तो बांके बिहारी ही खड़े हो जाते हैं। वी राधा नाम का उच्चारण सुनने के लिए उस भक्त के पीछे पीछे चल देते हैं केवल श्रीराधा नाम श्रवण करने के लिए।
ठाकुर जी की दयालुता तो देखो वे तो उस भक्त को सबकुछ देने के लिए सदैव तैयार रहते हैं जो भक्त श्रीराधा नाम लेते हैं।

*राधा राधा राधा राधा राधा*

वृन्दावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय।
यहाँ डाल डाल और पात पात श्री राधे राधे होय।।

*जय जय श्री राधे...*🦚🙏🚩

Comments

Popular posts from this blog

करवा चौथ व्रत-कथा की कहानी, करवाचौथ व्रत एवं पूजन विधि के साथ।।

कार्तिक माहात्म्य 113 | सांसर्गिक पुण्यसे धनेश्वरका उद्धार; दूसरोंके पुण्य और पापकी आंशिक प्राप्तिके कारण तथा मासोपवास व्रतकी संक्षिप्त विधि

वैशाखमास-माहात्म्य || अध्याय - 06 || भगवत् कथा के श्रवण और कीर्तन का महत्त्व तथा वैशाख मास के धर्मों के अनुष्ठान से राजा पुरुयशा का संकट से उद्धार