मथुरा नगरी #ब्रज84कोसयात्रा
मथुरा नगरी #ब्रज84कोसयात्रा
दिल्ली से 145 कि0मी0 तथा आगरा से 56 कि0मी0 की दूरी पर पवित्र यमुना नदी के पश्चिमी तट पर मथुरा नगरी अवस्थित है। पुराणों के अनुसार भगवान् राम के अनुज श्री शत्रुघ्न ने लवणासुर के वध के उपरान्त मथुरा नगरी की स्थापना की। कहा जाता है कि यदुवंशी - राजधानी मथुरापुरी ही समय के प्रवाह में परिवर्तित होते-होते मथुरा के नाम से प्रसिद्ध हुई।
मथुरा मोक्षदायिनी सप्तपुरियों में से एक है। मथुरा एवं आस-पास का क्षेत्र ब्रजभूमि के नाम से जाना जाता है। भगवान् श्रीकृष्ण की जन्म एवं लीला स्थली होने के कारण ब्रज क्षेत्र पुण्यतम तीर्थ है। मथुरा प्राचीन काल में शूरसेन जनपद की राजधानी भी रहा है। मथुरा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण आगरा-दिल्ली-जयपुर सुनहरे त्रिकोण पर स्थित है।
दूसरी और तीसरी शताब्दी में बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्र के रूप में मथुरा का उल्लेख चीनी यात्री फाहयान (401 - 410 ई0) ने अपने यात्रा-विवरण में किया है। ब्रजक्षेत्र में ही 22 वें तीर्थंकर श्री नेमिनाथ जी का भी जन्म माना जाता है। इस प्रकार एक महत्वपूर्ण जैन तीर्थ के रूप में भी मथुरा की पर्याप्त प्रसिद्धि रही है। सौंख टीला, कंकाली टीला, कंसकिला एवं अन्य स्थल इसके पुरातात्विक महत्त्व के साक्षी हैं। सोलहवीं शताब्दी में ब्रजक्षेत्र काव्य, संगीत व ललित कलाओं के सांस्कृतिक पुनरुत्थान का केंद्र बना। महाप्रभु बल्लभाचार्य, चैतन्य महाप्रभु, रूप सनातन, स्वामी हरिदास जी महाराज, हित हरिवंश महाप्रभु, हरिराम व्यास आदि संतों ने ब्रज को अपनी कर्मस्थली बनाया व ब्रजभाषा को अपनी रचनाओं से समृद्ध किया।
मथुरा मन्दिर
श्री कृष्ण जन्मस्थान - मथुरा
श्री द्वारकाधीश मंदिर - मथुरा
भूतेश्वर महादेव मंदिर - मथुरा
श्री रंगेश्वर महादेव - मथुरा
गायत्री तपोभूमि - मथुरा
बिरला मंदिर / गीता मंदिर - मथुरा
काली माता मंदिर - मथुरा
श्री आदि वराह देव जी मंदिर - मथुरा
केशव देव जी का मंदिर - मथुरा
श्री दीर्घ विष्णु मंदिर - मथुरा
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